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शेयर बाजार में आज 30 अप्रैल को भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 850+ अंक और निफ्टी 275+ अंक टूटा। जानें कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की गिरावट और अमेरिका-ईरान तनाव का असर।
भारतीय शेयर बाजार में आज, 30 अप्रैल 2026 को ‘ब्लैक थर्सडे’ जैसा मंजर देखने को मिल रहा है। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए। बेंचमार्क इंडेक्स करीब 1.1% से अधिक टूट गए, जिसमें सेंसेक्स लगभग 852 अंक गिरकर 76,641 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 275 अंक फिसलकर 23,900 के पास कारोबार कर रहा है। बाजार में यह बिकवाली इतनी व्यापक है कि आईटी को छोड़कर लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और भू-राजनीतिक तनाव
बाजार गिरने का सबसे बड़ा और प्राथमिक कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $126 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। मध्य पूर्व (West Asia) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने के फैसले ने तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर पैदा कर दिया है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से व्यापार घाटा बढ़ने और रुपये के कमजोर होने की आशंका ने निवेशकों को बाजार से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया है।
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट और डॉलर की मजबूती
आज भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 95.27 पर पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स के 100 के पार बने रहने और सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की मांग बढ़ने से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव है। जब रुपया रिकॉर्ड स्तर पर कमजोर होता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए भारतीय बाजार से मुनाफा कमाना मुश्किल हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वे घरेलू शेयरों में भारी बिकवाली कर रहे हैं। डॉलर की यह मजबूती सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर और महंगाई दर को प्रभावित कर रही है, जो शेयर बाजार के सेंटिमेंट को खराब कर रही है।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर्स में भारी बिकवाली
बाजार में आई इस गिरावट का नेतृत्व ‘रेट-सेंसिटिव’ सेक्टर्स, विशेष रूप से बैंकिंग और ऑटो ने किया है। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1.6% से अधिक की गिरावट देखी गई है। बैंकिंग स्टॉक्स में कमजोरी का मुख्य कारण बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंता है, जिससे भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। वहीं, निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2% तक गिरकर इस सत्र का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ने और ईंधन महंगा होने की आशंका ने वाहन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों ने इन शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) का पलायन और वैश्विक प्रभाव
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के कारण निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों (जैसे शेयर) से हटकर सुरक्षित ठिकानों (जैसे डॉलर और सोना) की ओर रुख कर रहे हैं। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स का 1,700 अंक और निफ्टी का 500 अंक तक गिरना (दिन के निचले स्तरों पर) यह दर्शाता है कि बाजार में इस समय ‘पैनिक सेलिंग’ की स्थिति है। जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक भारतीय बाजारों में रिकवरी की उम्मीद कम नजर आ रही है।