Table of Contents
22 जुलाई 2026 को शेयर बाजार में भारी गिरावट। ट्रम्प की फार्मा टैरिफ नीति, अमेरिका-ईरान युद्ध तनाव से $92 पहुंचे कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी के कारण सेंसेक्स 600+ अंक टूटा। जानिए गिरावट के मुख्य कारण।
बुधवार, 22 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार से ही चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) 600 अंक से अधिक गिरकर 76,856 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (Nifty 50) 175 अंक की गिरावट के साथ 24,013 पर फिसल गया।
बाजार में बिकवाली केवल मुख्य सूचकांकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.9% और स्मॉलकैप 100 में 1.3% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जेनेरिक दवाओं पर नया टैरिफ प्लान, अमेरिका-ईरान युद्ध तनाव के चलते कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और भारतीय रुपये की कमजोरी जैसे प्रमुख वैश्विक कारण रहे।
1. ट्रम्प का फार्मा टैरिफ प्लान: भारतीय दवा कंपनियों के शेयरों में हड़कंप
शेयर बाजार में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जेनेरिक दवाओं के आयात पर चरणबद्ध (Phased) टैरिफ लगाने की घोषणा रही। ट्रम्प ने ऐलान किया कि अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर अगले दो वर्षों तक शून्य शुल्क लगेगा, लेकिन इसके बाद तीसरे वर्ष में 100% और चौथे वर्ष से 200% का भारी टैरिफ वसूला जाएगा।
इस घोषणा से भारतीय फार्मा क्षेत्र की भविष्य की निर्यात कमाई पर गहरे संकट के बादल मंडराने लगे हैं:
- निफ्टी फार्मा इंडेक्स (Nifty Pharma Index): इसमें 1.9% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
- प्रभावित शेयर: सन फार्मा, सिप्ला, डॉ रेड्डीज, लुपिन और अरबिंदो फार्मा के शेयर 2% से 3.5% तक टूट गए।
चूंकि भारतीय फार्मा कंपनियां अमेरिका के जेनेरिक बाजार की मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं, इसलिए इस नीतिगत बदलाव ने निवेशकों के भरोसे को करारा झटका दिया है।
2. अमेरिका-ईरान युद्ध तनाव से कच्चे तेल में उबाल ($92 प्रति बैरल)
मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उसने ईरान में सैन्य ठिकानों, ड्रोन डिपो और रसद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर लगातार 11वें दिन भारी हवाई हमले किए। इसके अलावा यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी की धमकियों ने आग में घी का काम किया है।
इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 92 डॉलर प्रति बैरल के पांच हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देश के लिए चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति (Inflation) के दृष्टिकोण से अत्यंत चिंताजनक हैं।
3. बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में चौतरफा बिकवाली
बाजार पर दूसरा सबसे बड़ा दबाव बैंक्स और वित्तीय सेवा प्रदाताओं के शेयरों में आई भारी बिकवाली के कारण देखने को मिला:
- निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स: 1.1% गिर गया।
- निफ्टी बैंक और पीएसयू बैंक इंडेक्स: क्रमशः 0.9% और 1.6% टूट गए।
एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसे दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार उबर नहीं सका।
4. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 11 पैसे लुढ़का
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। बुधवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 96.36 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये की इस ऐतिहासिक कमजोरी ने भी शेयर बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाने का काम किया।
22 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट यह दर्शाती है कि घरेलू बाजार वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitical Tensions) और अमेरिकी व्यापार नीतियों से गहराई से प्रभावित हैं। जब तक मध्य पूर्व में शांति के संकेत नहीं मिलते और कच्चे तेल की कीमतें नीचे नहीं आतीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है, जिसके टूटने पर और गिरावट देखी जा सकती है।