ममता बनर्जी के लिए क्यों है बंगाल के इतिहास की ये सबसे बड़ी हार? CM ही नहीं ये 17 मंत्री भी नहीं बचा सके अपनी सीट

ममता बनर्जी के लिए क्यों है बंगाल के इतिहास की ये सबसे बड़ी हार? CM ही नहीं ये 17 मंत्री भी नहीं बचा सके अपनी सीट

पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की भवानीपुर से हार ने सबको चौंका दिया है। केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि उनकी कैबिनेट के 17 कद्दावर मंत्री भी चुनाव हार गए हैं। जानिए बंगाल की राजनीति में आए इस बड़े बदलाव की वजह।

 

ममता बनर्जी की ऐतिहासिक हार और शुभेंदु अधिकारी का दबदबा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके पूर्व सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के हाथों भवानीपुर सीट पर 15,501 वोटों से करारी हार का सामना करना पड़ा है। यह लगातार दूसरी बार है जब ममता बनर्जी शुभेंदु अधिकारी से हारी हैं; इससे पहले 2021 में नंदीग्राम में भी उन्हें शिकस्त मिली थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शुभेंदु को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को महज 58,801 वोटों पर संतोष करना पड़ा।

तृणमूल कांग्रेस के किले में सेंध: दिग्गजों का पतन

इस चुनाव में केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनकी कैबिनेट के कई दिग्गज मंत्री और कद्दावर नेता ताश के पत्तों की तरह ढह गए। वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु, ज्योतिप्रिय मल्लिक और कृषि मंत्री बेचराम मन्ना जैसे बड़े नाम अपनी सीटें नहीं बचा सके। कोलकाता और उसके आसपास के शहरी इलाकों, जैसे दमदम, रासबिहारी और टॉलीगंज में भी तृणमूल को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, शिक्षक भर्ती घोटाले में फंसे परेश चंद्र अधिकारी और बिधाननगर के सुजीत बसु को भी मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया।

रिकॉर्ड मतदान और सत्ता विरोधी लहर का प्रभाव

15 साल के शासन के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए यह चुनाव सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हुआ। भ्रष्टाचार के आरोपों, भर्ती घोटालों और जनता की गहरी नाराजगी ने इस बार ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) को चरम पर पहुँचा दिया। इस चुनाव की सबसे उल्लेखनीय विशेषता 92.47 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान रहा, जिसने 2011 के ऐतिहासिक आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस भारी मतदान ने यह स्पष्ट कर दिया कि बंगाल की जनता इस बार बड़े बदलाव के मूड में थी।

भाजपा की लहर और टीएमसी का सफाया

नतीजे साफ दिखाते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने पूरे राज्य में एक जबरदस्त लहर पैदा की। सिलीगुड़ी में गौतम देब की 73,000 से अधिक वोटों से हार और भांगड़ में शौकत मोल्ला को आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी द्वारा दी गई शिकस्त ने टीएमसी के पारंपरिक समीकरणों को बिगाड़ दिया। आसनसोल उत्तर, सिंगूर और बैरकपुर जैसी हॉट सीटों पर मिली हार यह दर्शाती है कि तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा इस बार विपक्ष की रणनीति के सामने विफल रहा है।

Related posts

RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: जातिवाद मिटाने के लिए अंतर्जातीय विवाह का करें समर्थन, राजनीति पर साधा निशाना

सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा ऐलान, 1000 दिनों तक होगी विशेष पूजा

पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और राजनीतिक घमासान: ममता-अखिलेश की मुलाकात पर दिलीप घोष का पलटवार

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More