पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मॉल, बड़े खुदरा कारोबार और ई-कॉमर्स कंपनियों की बिक्री बढ़ी, जबकि छोटी पूजा समितियों, पारंपरिक दुकानदारों और फेरीवालों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का त्योहार हर साल बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोजगार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल दुर्गा पूजा के दौरान कारोबार की तस्वीर मिली-जुली रही। जहां बड़ी दुर्गा पूजा समितियों, शॉपिंग मॉल, संगठित खुदरा कारोबार और ऑनलाइन खरीदारी करने वाले मंचों ने अच्छी कमाई दर्ज की, वहीं छोटी पूजा समितियों, पारंपरिक बाजारों और रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले कारोबारियों को अपेक्षाकृत कम लाभ मिला। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस वर्ष करीब 13 हजार अधिक दुर्गा पूजा आयोजनों का आयोजन किया गया। इसके बावजूद बड़े बजट वाली पूजा और छोटे सामुदायिक आयोजनों के बीच कारोबार का अंतर साफ दिखाई दिया।
बड़े पूजा आयोजनों में विज्ञापन से बढ़ी कमाई
इस वर्ष कोलकाता और आसपास के इलाकों में बड़े और लोकप्रिय दुर्गा पूजा आयोजनों के लिए विज्ञापन की मांग काफी मजबूत रही। प्रमुख पूजा पंडालों में बाहरी विज्ञापन के लिए उपलब्ध जगह पहले ही बुक हो गई, जबकि विज्ञापन दरों में कम से कम 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। इसके पीछे एलईडी डिजिटल होर्डिंग के बढ़ते इस्तेमाल को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। दूसरी ओर, छोटी पूजा समितियों को विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने में परेशानी का सामना करना पड़ा और उनके लगभग 30 प्रतिशत आउटडोर विज्ञापन स्लॉट खाली रह गए।
फोरम फॉर दुर्गोत्सव से जुड़े काजोल सरकार के अनुसार, विज्ञापन देने वाली कंपनियां अब अपने प्रचार के लिए चुनिंदा रास्तों और प्रमुख स्थानों पर अधिक ध्यान दे रही हैं। वे पहले की तरह हर इलाके में विज्ञापन फैलाने के बजाय उन स्थानों को प्राथमिकता दे रही हैं, जहां अधिक भीड़ और बेहतर व्यावसायिक पहुंच मिलने की संभावना है। पायनियर पब्लिसिटी कॉरपोरेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष अमित मित्रा ने भी कहा कि एलईडी डिस्प्ले के कारण बड़े बजट वाले पूजा आयोजनों में विज्ञापन दरें कम से कम 20 प्रतिशत बढ़ीं, लेकिन कंपनियों ने छोटी सड़कों और छोटे पूजा आयोजनों में खर्च सीमित कर दिया।
पार्क स्ट्रीट और प्रमुख इलाकों में बढ़ी विज्ञापन गतिविधियां
कोलकाता के पार्क स्ट्रीट, कैमैक स्ट्रीट और थिएटर रोड जैसे इलाके विज्ञापन गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे। इन स्थानों पर लोगों की आवाजाही और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी अधिक रही। नतीजतन, प्रमुख इलाकों में कारोबार और विज्ञापन से होने वाली कमाई को बढ़ावा मिला, जबकि छोटे इलाकों में आयोजन करने वाली समितियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। इस स्थिति ने त्योहार के आर्थिक लाभों के समान वितरण पर सवाल खड़े किए हैं।
शॉपिंग मॉल और बड़े खुदरा कारोबार में शानदार बिक्री
दुर्गा पूजा से पहले और त्योहार के दौरान शॉपिंग मॉल तथा संगठित खुदरा कारोबार में ग्राहकों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। प्राइमार्क प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ पंसारी के अनुसार, पूजा से पहले के 45 दिनों में उनकी कंपनी के मॉल में ग्राहकों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में करीब 17 प्रतिशत बढ़ी। सितंबर में जहां लगभग पांच लाख लोग मॉल पहुंचे, वहीं अक्टूबर में यह संख्या बढ़कर करीब सात लाख हो गई।
कंपनी के मुताबिक, महिलाओं के कपड़ों, बच्चों के परिधानों, जूतों, पुरुषों के कैजुअल कपड़ों और सौंदर्य उत्पादों की मांग मजबूत रही। इसके अलावा, प्रमुख खुदरा दुकानों पर महंगे उत्पादों की खरीदारी भी देखने को मिली। अक्टूबर के दौरान त्योहार से जुड़ा कारोबार लगभग 38 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई। स्टाइल बाजार, बाजार कोलकाता, फैशन बाजार और जूडियो जैसे खुदरा ब्रांडों के स्टोरों में भी भारी भीड़ रही। इन दुकानों ने मध्यम और कम आय वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित किया।
ऑनलाइन खरीदारी और भारी छूट से पारंपरिक दुकानदार परेशान
दूसरी ओर, ऑनलाइन खरीदारी में बढ़ती दिलचस्पी ने पारंपरिक दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पश्चिम बंगाल व्यापार संघों के परिसंघ ने सोमवार को ई-कॉमर्स मंचों पर त्योहार के दौरान दी जा रही भारी छूट और बढ़ती ऑनलाइन बिक्री को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार, त्योहार के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने लगभग 24,000 करोड़ रुपये की बिक्री की।
परिसंघ के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चिंता ऑनलाइन कारोबार के विकास को लेकर नहीं, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दुकानों की कीमतों के बीच बढ़ते अंतर को लेकर है। बड़ी ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दी जा रही छूट का मुकाबला करना छोटे दुकानदारों के लिए मुश्किल हो रहा है। ऐसे में ग्राहकों का रुझान पारंपरिक दुकानों से हटकर ऑनलाइन मंचों की ओर बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय कारोबारियों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
रेहड़ी-पटरी वालों की कमाई पर भी पड़ा असर
छोटे व्यापारियों और फेरीवालों को भी इस बदलाव का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हॉकर जॉइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधि असीत कुमार साहा के मुताबिक, ऑनलाइन खरीदारी, बड़े डिपार्टमेंट स्टोर और मॉल के विस्तार से एमजी रोड, बड़ाबाजार, हाथीबागान, श्यामबाजार, जादवपुर और कुछ हद तक गरियाहाट जैसे पारंपरिक बाजारों में छोटे विक्रेताओं का कारोबार प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा, दुर्गा पूजा के बाद कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने की संभावित कार्रवाई की आशंका ने भी फेरीवालों की चिंता बढ़ा दी है। ग्राहकों की ओर से अधिक मोलभाव किए जाने के कारण उनका मुनाफा घट रहा है। कई बार विक्रेताओं को लागत से कम कीमत पर सामान बेचना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
छोटे कारोबारियों की सुरक्षा के लिए सरकारी सहयोग की जरूरत
सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज, कलकत्ता के अर्थशास्त्री और प्रोफेसर सैबल कर ने कहा कि कोलकाता में दुर्गा पूजा की खरीदारी पारंपरिक रूप से दो बड़े वर्गों में बंटी रही है। एक ओर संपन्न ग्राहक मॉल और बड़े ब्रांडों से खरीदारी करते हैं, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग राशबिहारी, बड़ाबाजार और हाथीबागान जैसे बाजारों से कपड़े और अन्य सामान खरीदते हैं। उनके अनुसार, बड़े कारोबार और पूंजी को प्राथमिकता मिलने से छोटे खुदरा विक्रेताओं तथा फेरीवालों के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई क्षेत्र लगभग 60 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है। ऐसे में सरकार को छोटे कारोबारियों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए। बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों और पारंपरिक बाजारों को भी त्योहार की आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलना जरूरी है। इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान कारोबार में आई असमानता ने स्पष्ट कर दिया है कि त्योहार की बढ़ती व्यावसायिक चमक के बीच छोटे कारोबारियों को पीछे छूटने से बचाने के लिए संतुलित नीतियों और प्रभावी सरकारी सहयोग की आवश्यकता है।