बीदर में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ कहने को लेकर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि खड़गे आतंकवाद और उससे लड़ने वालों में फर्क नहीं समझते।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन: कर्नाटक के आधिकारिक दौरे पर आए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर उनके हालिया बयानों को लेकर तीखा हमला बोला। बीदर के भालकी स्थित श्री चन्नबसवाश्रम में डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के 75वें जन्मोत्सव (अमृत महोत्सव) समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस नेता आतंकवाद और उससे डटकर लड़ने वालों के बीच अंतर करने में पूरी तरह विफल रहते हैं।
अमृत महोत्सव के मंच पर राजनीतिक वार-पलटवार
बीदर में आयोजित इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प स्थिति तब बनी जब उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के कटाक्ष के समय खुद मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और राज्य के मंत्री ईश्वर खंड्रे भी मंच पर मौजूद थे। संबोधन के दौरान उपराष्ट्रपति ने खड़गे को अपना “अच्छा दोस्त” कहकर संबोधित किया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि उनके बीच केवल “दृष्टिकोण का अंतर” है। उपराष्ट्रपति ने अपनी बात को और धार देते हुए कहा कि कभी-कभी उन्हें ऐसा महसूस होता है कि खड़गे जी काले और सफेद के बीच, या एक आतंकवादी और देश की सुरक्षा के लिए आतंकवाद का सामना करने वालों के बीच फर्क नहीं कर पा रहे हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि: पीएम मोदी पर खड़गे की टिप्पणी
उपराष्ट्रपति की यह तल्ख टिप्पणी मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा एक दिन पहले चेन्नई में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए उस बयान के जवाब में आई है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी। दरअसल, चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खड़गे ने भाजपा और AIADMK के गठबंधन की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री के लिए “आतंकवादी” शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री सरकारी एजेंसियों और राज्य मशीनरी का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों को “आतंकित” कर रहे हैं। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ता देख खड़गे ने स्पष्टीकरण दिया था कि उनका मतलब शाब्दिक रूप से ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि वह यह कहना चाहते थे कि पीएम मोदी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को डरा रहे हैं। अब बीदर के मंच से उपराष्ट्रपति ने इसी मुद्दे पर खड़गे को कड़ा संदेश दिया है।