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विवेक अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी की भवानीपुर हार पर प्रतिक्रिया देते हुए पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे ‘द कश्मीर फाइल्स’ के समय उन्हें बंगाल में प्रतिबंधित किया गया था।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए हालिया बड़े उलटफेर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार के बाद राज्य की राजनीतिक दिशा बदलती नजर आ रही है। इस सत्ता परिवर्तन पर फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पुराना वीडियो साझा करते हुए उस दौर को याद किया जब ममता बनर्जी के शासनकाल में उन्हें अपनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ और आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर भारी विरोध और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था।
विवेक अग्निहोत्री का ‘कैंसल कल्चर’ पर प्रहार: “नेवर अगेन”
विवेक अग्निहोत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक लंबा और भावुक कैप्शन लिखा है, जिसकी शुरुआत उन्होंने “NEVER AGAIN” (फिर कभी नहीं) शब्दों के साथ की। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ की सफलता के बाद उन्हें बंगाल में पूरी तरह से ‘कैंसल’ कर दिया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में साझा किया कि किस तरह उनकी फिल्म को सिनेमाघरों से जबरन हटा दिया गया था और उन्हें राज्य में प्रवेश न करने देने की धमकियां दी गई थीं। विवेक के अनुसार, यह केवल एक फिल्म का विरोध नहीं था, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार था।
ममता बनर्जी बनाम विवेक अग्निहोत्री: पुराना विवाद
फिल्म निर्माता ने उस कठिन समय को याद किया जब ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंचों से उनकी फिल्मों की आलोचना की थी। विवेक ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया था कि वह बंगाल की धरती पर कदम न रख सकें। सत्ता में आए इस बदलाव को विवेक अग्निहोत्री ने एक ‘स्वतंत्रता’ के रूप में देखा है। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए बताया कि कैसे एक फिल्म निर्माता के रूप में उन्हें बंगाल की कहानियों (The Bengal Files) पर काम करने से रोका गया और डराया गया। अब भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार के बाद, विवेक इसे उन सभी आवाजों की जीत बता रहे हैं जिन्हें दबाने की कोशिश की गई थी।
‘द बंगाल फाइल्स’ और भविष्य की योजनाएं
विवेक अग्निहोत्री लंबे समय से ‘द बंगाल फाइल्स’ नामक प्रोजेक्ट पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें वे बंगाल के विभाजन और वहां हुई हिंसा के अनकहे पहलुओं को सामने लाना चाहते हैं। उन्होंने पहले भी कहा था कि ममता बनर्जी के शासन में इस फिल्म पर काम करना लगभग असंभव था क्योंकि राज्य मशीनरी उनके खिलाफ थी। अब राजनीतिक समीकरण बदलने के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी इस फिल्म के निर्माण में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं। विवेक का मानना है कि बंगाल की जनता ने बदलाव को चुनकर यह संदेश दिया है कि अब किसी भी कलाकार या उसकी कला को राजनीतिक द्वेष के चलते प्रतिबंधित नहीं किया जा सकेगा।
अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीति
विवेक अग्निहोत्री की यह प्रतिक्रिया केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह फिल्म उद्योग और राजनीति के बीच के तनावपूर्ण संबंधों को भी उजागर करती है। शुभेंदु अधिकारी की जीत और ममता बनर्जी की अपनी ही सीट पर हार ने उन लोगों को मुखर होने का मौका दिया है जो खुद को पूर्ववर्ती सरकार का पीड़ित मानते रहे हैं। विवेक ने अपनी पोस्ट के अंत में यह उम्मीद जताई कि बंगाल में अब एक ऐसा वातावरण बनेगा जहाँ कला और संस्कृति बिना किसी भय के फल-फूल सकेंगी।