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विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ आखिरकार पश्चिम बंगाल में रिलीज हो रही है। जानें 2025 में लगे अघोषित प्रतिबंध, पल्लवी जोशी के आरोपों और गोपाल पाठा विवाद की पूरी कहानी।
विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ (The Bengal Files) एक बार फिर सुर्खियों में है। सितंबर 2025 में जब यह फिल्म देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तब पश्चिम बंगाल के दर्शकों को इसे बड़े पर्दे पर देखने का मौका नहीं मिला था। फिल्म पर ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाने के आरोप लगे और राज्य के थिएटर मालिकों ने सर्वसम्मति से इसे न दिखाने का फैसला किया। लेकिन अब, जबकि फिल्म आखिरकार बंगाल में रिलीज होने जा रही है, यह समझना जरूरी है कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था और इसे ‘अघोषित प्रतिबंध’ क्यों कहा गया।
क्या पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाया था?
दस्तावेजी तौर पर देखा जाए तो तत्कालीन ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने ‘द बंगाल फाइल्स’ पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया था। इसके बावजूद, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में एक भी सिनेमा हॉल में यह फिल्म नहीं दिखाई गई। थिएटर मालिकों का तर्क था कि उनके पास अन्य फिल्मों के साथ पहले से प्रतिबद्धताएं थीं और स्क्रीन की उपलब्धता सीमित थी। हालांकि, फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और निर्माता पल्लवी जोशी ने इसे राजनीतिक दबाव में लगाया गया ‘अघोषित प्रतिबंध’ करार दिया था।
पल्लवी जोशी का राष्ट्रपति को पत्र और डराने-धमकाने के आरोप
फिल्म को स्क्रीन न मिलने पर पल्लवी जोशी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि फिल्म को जनता तक पहुंचने से पहले ही खामोश करने की साजिश रची गई। पल्लवी ने पत्र में दावा किया, “हमारे खिलाफ निराधार प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं, पुलिस ने ट्रेलर को ब्लॉक कर दिया और समाचार पत्रों ने विज्ञापन छापने से मना कर दिया। मेरे परिवार को राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा रोजाना धमकियां दी जा रही हैं। थिएटर मालिकों ने हमें बताया है कि उन्हें सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे वे हिंसा के डर से फिल्म दिखाने से इनकार कर रहे हैं।”
‘गोपाल पाठा’ के चित्रण पर कानूनी विवाद
फिल्म केवल राजनीतिक विरोध तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसे कानूनी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। ऐतिहासिक व्यक्तित्व गोपाल मुखर्जी, जिन्हें ‘गोपाल पाठा’ के नाम से जाना जाता है, के परिवार ने फिल्म में उनके चित्रण पर आपत्ति जताई थी। परिवार का आरोप था कि अग्निहोत्री ने बिना अनुमति के उन्हें नकारात्मक रूप से चित्रित किया है। इस मुद्दे पर एक प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी, जिसने फिल्म के इर्द-गिर्द चल रहे विवाद को और गहरा कर दिया।
निर्माताओं का स्पष्टीकरण: “किसी का अपमान नहीं किया गया”
विवादों के बीच, पल्लवी जोशी ने स्पष्ट किया कि फिल्म में गोपाल पाठा का कोई अपमान नहीं किया गया है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, “उनके प्रति कोई अनादर नहीं दिखाया गया है। कानूनी नोटिस में जो भी दावे किए जा रहे हैं, वे सब झूठे हैं। हमारे पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। एक बार जब फिल्म रिलीज हो जाएगी, तो सबको सच्चाई पता चल जाएगी।”
बंगाल में एक नई शुरुआत
सितंबर 2025 से अब तक का सफर ‘द बंगाल फाइल्स’ के लिए संघर्षपूर्ण रहा है। अब जब फिल्म पश्चिम बंगाल के सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इसे किस तरह अपनाते हैं। यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विमर्श के बीच छिड़ी जंग का प्रतीक बन गई है।