वरुथिनी एकादशी पर क्या न करें? भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना नहीं मिलेगा व्रत का फल

वरुथिनी एकादशी पर क्या न करें? भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना नहीं मिलेगा व्रत का फल

वरुथिनी एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए? जानें इस व्रत के कड़े नियम, वर्जित खाद्य पदार्थ (जैसे चावल और मसूर की दाल) और उन गलतियों के बारे में जिनसे भगवान विष्णु रुष्ट हो सकते हैं।

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी को सौभाग्य और पुण्य देने वाला माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के ‘वराह अवतार’ की पूजा की जाती है। माना जाता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को दस हजार वर्षों की तपस्या के बराबर फल मिलता है।

लेकिन किसी भी व्रत की पूर्णता केवल पूजा करने से नहीं, बल्कि उसके नियमों के पालन से होती है। वरुथिनी एकादशी पर कुछ कामों को वर्जित माना गया है। आइए जानते हैं कि इस दिन आपको क्या नहीं करना चाहिए।

1. चावल का सेवन न करें

एकादशी के दिन चावल का सेवन सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति एकादशी के दिन चावल खाता है, वह अगले जन्म में रेंगने वाले जीव के रूप में जन्म लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस दिन शरीर में जल की मात्रा को संतुलित रखने के लिए चावल (जो जल सोखता है) से बचने की सलाह दी जाती है।

2. तामसिक भोजन से दूर रहें

वरुथिनी एकादशी के दिन मांस, मछली, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विकता बनाए रखना बहुत जरूरी है। यदि आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी एकादशी के दिन घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए।

3. मसूर की दाल और शहद वर्जित

वरुथिनी एकादशी के संदर्भ में ‘नारद पुराण’ और अन्य शास्त्रों में कुछ विशिष्ट खाद्य पदार्थों को वर्जित बताया गया है। इस दिन मसूर की दाल, चना, कोदो और शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि मसूर की दाल अशुद्धता का प्रतीक है, इसलिए इसे पूजा के दिन वर्जित रखा गया है।

4. क्रोध और वाद-विवाद से बचें

व्रत का अर्थ केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि मन पर नियंत्रण रखना भी है। वरुथिनी एकादशी पर किसी से झगड़ा न करें, अपशब्द न बोलें और न ही किसी की चुगली (निंदा) करें। मन में शांति बनाए रखें और भगवान विष्णु के नाम का जाप करें।

5. ब्रह्मचर्य का पालन और संयम

एकादशी की तिथि पर काम वासना का त्याग करना चाहिए और पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन विलासिता और शारीरिक सुखों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा को भक्ति में लगाना चाहिए।

6. नाखून काटना या बाल कटवाना

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है। इससे धन की हानि होती है और घर में दरिद्रता आती है। इसलिए यह काम एक दिन पहले या बाद में कर लेना चाहिए।

7. कांसे के बर्तनों का प्रयोग न करें

वरुथिनी एकादशी के दिन कांसे (Bronze) के बर्तनों में भोजन करना या पानी पीना वर्जित बताया गया है। इस दिन मिट्टी, तांबे या पीतल के बर्तनों का उपयोग करना श्रेयस्कर माना जाता है।

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