वैशाख माह 2026: 3 अप्रैल से शुरू, पुण्य और शुभ कार्य करने का श्रेष्ठ समय

वैशाख माह 2026: 3 अप्रैल से शुरू, पुण्य और शुभ कार्य करने का श्रेष्ठ समय

वैशाख माह 2026 3 अप्रैल से 1 मई तक रहेगा। इस पुण्यदायी महीने में किए गए दान, व्रत और धार्मिक कार्य अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। जानें शुभ कार्य और त्योहार।

हिंदू पंचांग के अनुसार साल के 12 महीनों में वैशाख का महीना सबसे पुण्यदायी माना जाता है। इस वर्ष वैशाख माह 3 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 1 मई 2026 तक रहेगा। स्कंद पुराण के अनुसार, “न वैशाखसमो मासो न कृतं समं तपः। न दानं सममस्त्येव न गंगा सममं जलम्॥” – अर्थात वैशाख के समान कोई महीना नहीं, न ही इसके बराबर कोई दान, तप या गंगा जल का महत्व है।

वैशाख में सूर्य की तपिश बढ़ने के साथ-साथ किए गए धर्म-कर्म का महत्व भी बढ़ जाता है। ऋषि-मुनियों के अनुसार यह आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का श्रेष्ठ समय है।

वैशाख में किए जाने वाले शुभ कार्य

  1. विवाह, मुंडन और नामकरण – इस महीने में विवाह और शिशु संस्कार करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होने के कारण जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता मिलती है।
  2. नए घर का निर्माण और गृह प्रवेश – नया घर बनवाना या उसमें प्रवेश करना शुभ माना गया है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और लक्ष्मी का वास सुनिश्चित करता है।
  3. खरीदारी – विशेषकर अक्षय तृतीया के दिन सोना और बहुमूल्य वस्तुएं खरीदना लाभकारी होता है। ऐसा मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदारी कभी घटती नहीं।
  4. धार्मिक कार्य – हवन, यज्ञ, सत्संग और पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। सुहागिनों के लिए भोजन और सुहाग सामग्री दान करना भी शुभ है।

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वैशाख माह में दान और पुण्य

पुराणों के अनुसार, वैशाख में किया गया स्नान, दान और जप कभी नष्ट नहीं होता और पाप नाश करने वाला माना गया है। गर्मी के मौसम में प्यासे और जरूरतमंदों को जल, घड़ा, छाता, वस्त्र, फल और सत्तू देना अत्यंत पुण्यकारी है।

ज्योतिषीय महत्व

वैशाख मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस महीने सूर्य मेष राशि में रहते हैं और मेष संक्रांति के साथ सौर कैलेंडर का नया साल भी प्रारंभ होता है।

वैशाख माह 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार

  • 3 अप्रैल – वैशाख माह का आरंभ
  • 5 अप्रैल – विकट संकष्टी चतुर्थी
  • 9 अप्रैल – मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
  • 10 अप्रैल – कालाष्टमी
  • 13 अप्रैल – वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती, पंचक प्रारंभ
  • 14 अप्रैल – मेष संक्रांति, बैसाखी
  • 15 अप्रैल – बुध प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि
  • 17 अप्रैल – वैशाख अमावस्या
  • 19 अप्रैल – अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती, त्रेता युग दिवस
  • 20 अप्रैल – मातंगी जयंती, रोहिणी व्रत, संकर्षण चतुर्थी
  • 21 अप्रैल – शंकराचार्य जयंती, सूरदास जयंती
  • 22 अप्रैल – रामानुज जयंती, स्कंद षष्ठी
  • 23 अप्रैल – गंगा सप्तमी
  • 24 अप्रैल – बगलामुखी जयंती, मासिक दुर्गाष्टमी
  • 25 अप्रैल – सीता नवमी
  • 27 अप्रैल – मोहिनी एकादशी, सिद्धिलक्ष्मी जयंती, त्रिशूर पूरम
  • 28 अप्रैल – भौम प्रदोष व्रत, परशुराम द्वादशी
  • 30 अप्रैल – नृसिंह जयंती, छिन्नमस्ता जयंती
  • 1 मई – वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा

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