अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद अब ‘सेक्शन 301’ के जरिए जुलाई तक टैरिफ बहाल किए जा सकते हैं। जानें अमेरिकी अर्थव्यवस्था और महंगाई पर इसका असर।
अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था, इस साल जुलाई की शुरुआत तक फिर से पुराने स्तर पर बहाल हो सकते हैं।
वॉशिंगटन में आयोजित ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए बेसेंट ने कहा कि प्रशासन अपनी व्यापार नीतियों को फिर से कानूनी रूप से मजबूत बनाने पर काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ‘सेक्शन 301’ का सहारा
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा आपातकालीन शक्तियों (Emergency Powers) का उपयोग कर लगाए गए कई शुल्कों को असंवैधानिक करार दिया था। इस कानूनी बाधा को पार करने के लिए अब प्रशासन सेक्शन 301 (Section 301) का उपयोग करने की योजना बना रहा है।
बेसेंट के अनुसार:
- सेक्शन 301 का अध्ययन: सरकार वर्तमान में ‘सेक्शन 301’ के तहत व्यापार अध्ययन (Studies) कर रही है। यह एक ऐसा कानूनी तंत्र है जिसे पहले भी अदालतों में सही ठहराया गया है।
- व्यवसायों के लिए स्पष्टता: उन्होंने कहा कि इस वैकल्पिक कानूनी रास्ते से व्यवसायों को अपने पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की योजना बनाने में अधिक स्पष्टता और निश्चितता मिलेगी।
- समय सीमा: बेसेंट ने उम्मीद जताई कि जुलाई की शुरुआत तक टैरिफ फिर से अपने पिछले स्तरों पर वापस आ सकते हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विकास दर पर भरोसा
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संघर्ष के बावजूद, बेसेंट ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन पर भरोसा जताया। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस वर्ष अमेरिका की आर्थिक विकास दर 3% से 3.5% के बीच रह सकती है, जो कि कई विशेषज्ञों के अनुमान से अधिक है।
फेडरल रिजर्व पर साधा निशाना: “महंगाई पर गलत है फेड का आंकलन”
वित्त मंत्री बेसेंट ने महंगाई के मुद्दे पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Fed) की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि देश में बुनियादी मूल्य दबाव कम हो रहे हैं।
- ब्याज दरों में कटौती की मांग: बेसेंट ने कहा, “मेरा मानना है कि फेड महंगाई को समझने में गलत रहा है। कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) नीचे आ रहा है। अगर फेड डेटा के और साफ होने का इंतजार कर रहा है, तो इसका मतलब है कि भविष्य में ब्याज दरों में बड़ी कटौती की जानी चाहिए।”
- महंगाई का ताजा डेटा: हालांकि, मार्च में कोर इन्फ्लेशन में मामूली सुधार देखा गया था, लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जो फेड के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
वैश्विक व्यापार पर क्या होगा असर?
जुलाई से टैरिफ की बहाली भारत सहित उन सभी देशों के निर्यात पर असर डाल सकती है जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर सामान भेजते हैं। ट्रंप प्रशासन की यह ‘टैरिफ नीति’ वैश्विक सप्लाई चेन में एक बार फिर हलचल पैदा कर सकती है।