अमेरिका ने TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCLTech समेत आठ आईटी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया है। जानिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर इसका क्या असर होगा और TCS ने क्या कहा।
अमेरिका में काम करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों के सामने आव्रजन नियमों को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी श्रम विभाग ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज समेत आठ बड़ी टेक कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड से जुड़ी नई अर्जियां दाखिल करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर असर पड़ सकता है। PERM प्रक्रिया अमेरिकी कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार प्रमाणन हासिल करने में मदद करती है। हालांकि, भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनियों में शामिल TCS ने कहा है कि इस घटनाक्रम से उसकी भर्ती रणनीति और ग्राहकों के साथ कामकाज पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। इस फैसले के बाद भारतीय आईटी क्षेत्र में अमेरिकी आव्रजन नीतियों और कुशल कर्मचारियों की आवाजाही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
TCS, Infosys और Wipro समेत आठ कंपनियां कार्रवाई के दायरे में
अमेरिकी श्रम विभाग की कार्रवाई में TCS, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों के नाम शामिल हैं। इन कंपनियों का अमेरिका में बड़ा कारोबारी आधार है और वे वहां के ग्राहकों को तकनीकी परामर्श, सॉफ्टवेयर विकास, डिजिटल सेवाएं तथा अन्य आईटी समाधान उपलब्ध कराती हैं।
PERM कार्यक्रम रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया के तहत नियोक्ता को आम तौर पर यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए आवश्यक नियमों के अनुसार अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार हितों की रक्षा की गई है। इसके बाद पात्र कर्मचारी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रियाओं की ओर बढ़ सकते हैं।
ऐसे में किसी कंपनी का इस कार्यक्रम से निलंबित होना उसके लिए नई अर्जियां दाखिल करने या लंबित मामलों को आगे बढ़ाने में बाधा पैदा कर सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर संबंधित कंपनी पर लागू आदेश, निलंबन की शर्तों और प्रभावित कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
क्या है PERM प्रोग्राम और ग्रीन कार्ड से इसका संबंध?
PERM का पूरा नाम Permanent Labor Certification है। यह अमेरिकी श्रम विभाग की रोजगार प्रमाणन प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल कई नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से नौकरी पर रखने के लिए करते हैं। इस प्रक्रिया में नियोक्ता को निर्धारित शर्तों के तहत यह दिखाना होता है कि विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी श्रमिकों के रोजगार, वेतन और कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
PERM मंजूरी मिलने के बाद भी ग्रीन कार्ड अपने आप नहीं मिल जाता। इसके बाद नियोक्ता और कर्मचारी को रोजगार आधारित इमिग्रेशन प्रक्रिया के अन्य जरूरी चरण पूरे करने होते हैं। इनमें अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के समक्ष संबंधित याचिका और उपलब्धता के आधार पर आगे की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
इसलिए PERM से निलंबन को सीधे सभी कर्मचारियों के वीजा रद्द होने या अमेरिका में काम करने का अधिकार खत्म होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। इसका मुख्य संबंध रोजगार आधारित स्थायी निवास प्रक्रिया से है। प्रभावित कर्मचारियों के मामलों में अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं।
TCS ने कहा- भर्ती रणनीति और ग्राहकों पर असर की उम्मीद नहीं
इस घटनाक्रम के बीच TCS ने स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम से जुड़े फैसले के कारण उसकी भर्ती रणनीति या ग्राहकों को सेवाएं देने की क्षमता पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि TCS का अमेरिका उसके प्रमुख विदेशी बाजारों में से एक है।
भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका में बड़ी संख्या में ग्राहकों के डिजिटल बदलाव, सॉफ्टवेयर विकास, साइबर सुरक्षा और तकनीकी संचालन से जुड़े काम करती हैं। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कंपनियां स्थानीय कर्मचारियों, विदेश से भेजे गए विशेषज्ञों और विभिन्न वीजा श्रेणियों के तहत काम करने वाले पेशेवरों पर निर्भर रहती हैं।
यदि स्थायी निवास से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं, तो कंपनियों को कुछ कर्मचारियों के दीर्घकालिक करियर और नियुक्ति योजनाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है। हालांकि, TCS के बयान के मुताबिक, कंपनी को फिलहाल अपने कामकाज और भर्ती रणनीति पर बड़े प्रभाव की आशंका नहीं है।
H-1B वीजा और PERM प्रक्रिया में क्या है अंतर?
PERM निलंबन को समझते समय H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड के बीच अंतर जानना भी जरूरी है। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसके विपरीत, PERM रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से संबंधित है।
इसका मतलब है कि PERM कार्यक्रम से किसी कंपनी का निलंबन अपने आप उसके सभी H-1B कर्मचारियों का वीजा रद्द नहीं करता। हालांकि, जिन कर्मचारियों की दीर्घकालिक योजना रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर निर्भर है, उनके लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।
ऐसे कर्मचारियों को अपने मामले की स्थिति समझने के लिए कंपनी के मानव संसाधन विभाग और योग्य इमिग्रेशन विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। किसी भी कर्मचारी के लिए आगे के विकल्प उसके वीजा प्रकार, आवेदन की स्थिति और संबंधित सरकारी आदेश पर निर्भर करेंगे।
भारतीय IT सेक्टर पर क्या हो सकता है असर?
अमेरिकी बाजार भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए आव्रजन नियमों में बदलाव या सरकारी कार्रवाई का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता। कंपनियों को प्रतिभाओं को बनाए रखने, कर्मचारियों की तैनाती और भविष्य की मानव संसाधन योजना पर अतिरिक्त ध्यान देना पड़ सकता है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारतीय आईटी कंपनियों का अमेरिकी कारोबार तुरंत प्रभावित हो जाएगा। कंपनियां स्थानीय स्तर पर भर्ती, कर्मचारियों को अलग-अलग परियोजनाओं में तैनात करने और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के जरिए अपनी जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर सकती हैं। वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि निलंबन कितने समय तक रहता है और अमेरिकी अधिकारी आगे क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल, TCS का बयान बाजार और कर्मचारियों के लिए राहत का संकेत देता है, लेकिन आठ कंपनियों पर हुई कार्रवाई ने अमेरिकी आव्रजन नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले समय में इस मामले की आगे की स्थिति भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।