उत्तर प्रदेश सरकार की नई पहल: जनभागीदारी से उत्तर प्रदेश में टीबी मरीजों की पहचान पर जोर

उत्तर प्रदेश सरकार की नई पहल: जनभागीदारी से उत्तर प्रदेश में टीबी मरीजों की पहचान पर जोर

उत्तर प्रदेश सरकार ने जनभागीदारी के साथ 100 दिवसीय टीबी खोज अभियान शुरू किया, छिपे मरीजों की पहचान और जागरूकता बढ़ाने के लिए।

उत्तर प्रदेश सरकार ने तपेदिक (टीबी) को जड़ से खत्म करने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। फरवरी 2026 से प्रदेश में 100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान शुरू किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य छिपे हुए टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।

अभियान में जनभागीदारी पर विशेष ध्यान

इस बार अभियान में सांसद, विधायक, पार्षद, ग्राम प्रधान और सामाजिक संगठन तक को शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए हैं कि वे निःक्षय शिविरों और समीक्षा बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही ‘माई भारत’ वालंटियर्स और पंजीकृत निःक्षय मित्रों की मदद भी ली जाएगी, ताकि अभियान हर गांव और मोहल्ले तक पहुंच सके।

टीबी से मौतों में 17% कमी

स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि दिसंबर 2024 से चल रहे टीबी खोज अभियान का सकारात्मक असर सामने आया है। 2015 की तुलना में टीबी मरीजों की संख्या में 17% कमी और टीबी से होने वाली मौतों में भी 17% गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इसी सफलता को आगे बढ़ाने के लिए नया 100 दिवसीय अभियान शुरू किया जा रहा है।

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बुजुर्ग, गंभीर मरीज और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष जांच

अभियान के दौरान बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों, जेलों और मलिन बस्तियों में विशेष टीबी स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके अलावा, फैक्ट्रियों के श्रमिक, बस चालक-कंडक्टर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से संदिग्ध मरीजों की पहचान पर भी जोर दिया जाएगा।

स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान

टीबी से संबंधित जागरूकता बढ़ाने के लिए प्राथमिक स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर तक अभियान चलाया जाएगा। इसमें निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि बच्चे और युवा टीबी के लक्षण पहचान सकें और समय पर जांच करा सकें।

अभियान की रणनीति और प्रभाव

सरकार ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की है:

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से 5% और जिला अस्पतालों से 10% मरीजों को टीबी जांच के लिए रेफर करना

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था

  • बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता से जांच

  • एनजीओ, कॉरपोरेट और संस्थानों को निःक्षय मित्र के रूप में शामिल करना

टीबी मरीजों को रोजगार और आत्मनिर्भर बनाने की पहल

स्वास्थ्य विभाग ने कौशल विकास विभाग को पत्र भेजकर टीबी मरीजों को रोजगार प्रशिक्षण से जोड़ने का अनुरोध किया है, ताकि इलाज के साथ-साथ वे आत्मनिर्भर बन सकें।

उत्तर प्रदेश की यह पहल टीबी के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी और स्वास्थ्य जागरूकता को जोड़कर प्रभावी कदम साबित होने जा रही है।

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