आयरलैंड और इंग्लैंड में टी20 सीरीज हारने के बाद बीसीसीआई की समीक्षा पर सुनील गावस्कर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जल्दबाजी में फैसले न लेने की सलाह दी है।
हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरों पर टी20 अंतर्राष्ट्रीय सीरीज (T20I Series) में भारतीय क्रिकेट टीम की करारी हार के बाद देश के क्रिकेट गलियारों में हलचल मच गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) इस खराब प्रदर्शन को देखते हुए एक व्यापक समीक्षा बैठक करने जा रहा है। खेल जगत में भी अफवाहें व्याप्त हैं कि इस हार से कुछ बड़े नामों को अपनी जगह खोना पड़ सकता है। हालाँकि, भारत के महान पूर्व क्रिकेटर और महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) का मानना है कि ऐसा कोई भी बड़ा और कठोर कदम उठाना इस मोड़ पर बहुत जल्दबाजी और चरम कदम होगा।
गावस्कर ने याद दिलाया कि भारतीय टीम ने मार्च में ही अपना तीसरा टी20 वर्ल्ड कप जीता था और अभी भी आईसीसी टी20 रैंकिंग में दूसरे स्थान पर है। ऐसे में, सिर्फ कुछ द्विपक्षीय श्रृंखलाओं के परिणामों पर पूरी व्यवस्था को परिवर्तित करना उचित नहीं होगा।
हाल ही में भारत ने विश्व कप की ट्रॉफी जीती थी, लेकिन बदली हुई टीम और नए कप्तान श्रेयस अय्यर की कठिन शुरुआत वर्तमान में विश्व कप जीतने वाली टीम में कई महत्वपूर्ण खेलाडी नहीं हैं। महान बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव अब इस टीम से बाहर हैं, टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को आईपीएल सीजन से थकान के बाद आराम दिया गया है, और दिग्गज ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या चोट के कारण टीम से बाहर हैं।
ऐसे में नवनियुक्त कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम की कमान संभाली। यद्यपि, कप्तान के तौर पर अय्यर की शुरुआत निराशाजनक रही है। भारतीय टीम ने उनके नेतृत्व में लगातार छह मैचों में हार का सामना किया है, जिससे उनकी कप्तानी और रणनीति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लेकिन गावस्कर को लगता है कि घबराकर फैसले लेने से टीम को फायदा होने के बजाय नुकसान होगा। उनका कॉलम स्पोर्ट्स स्टार के लिए था:
बीसीसीआई अपनी हार की समीक्षा करने जा रहा है और चर्चा है कि कुछ लोगों को बर्खास्त कर दिया जा सकता है। भारत मुश्किल से चार महीने पहले विश्व चैंपियन बन गया था और आज भी दूसरे स्थान पर है, इसलिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा।”
फ्लैट पिच बहाना गलत है: गावस्कर ने बल्लेबाजी में तकनीकी कमियों को उजागर किया
सुनील गावस्कर ने यह भी कहा कि सपाट पिचों (Flat Batting Pitches) पर खेलने से भारतीय बल्लेबाजों का खेल बदला है। विरोध करते हुए, उन्होंने कहा कि आईपीएल के दौरान पिचें बल्लेबाजों के अनुकूल थीं, लेकिन अधिकांश भारतीय बल्लेबाजों को शॉर्ट-पिच गेंदों (Short Ball) के सामने संघर्ष करते देखा गया।
क्रिकेट प्रशंसकों की सबसे बड़ी चिंता यह रही कि भारतीय बल्लेबाजों ने आईपीएल में रन बनाकर इंग्लैंड और आयरलैंड की पिचों पर मूवमेंट, स्विंग और अतिरिक्त उछाल (Extra Bounce) के सामने पूरी तरह बेबस दिखाई दिया। गावस्कर ने इसे मानसिक विफलता से अधिक तकनीकी विफलता बताया।
भारतीय शॉर्ट बॉल बल्लेबाजों की कमजोरियों का तकनीकी विश्लेषण
गावस्कर ने बल्लेबाजों की कमजोरियों को विस्तृत रूप से समझाते हुए कहा कि भारतीय बल्लेबाजों का फुटवर्क तंत्र प्रतिक्रिया देता है जब गेंद छाती या चेहरे की ऊंचाई पर आती है। उनका कहना था:
पूरी तरह से तकनीकी समस्या है। बल्लेबाजों का पूरा वजन फ्रंट (आगे वाले पैर) और बैक (पीछे वाला पैर) पर होता है। जब गेंद आपके चेहरे की ओर तेजी से ऊपर उठती है, तो वजन को पीछे के पैर पर ट्रांसफर करने का कोई रास्ता नहीं बचता।”
गावस्कर का यह स्पष्ट विश्लेषण बताता है कि समस्या कप्तानी या बोर्ड के सदस्यों को बदलने की नहीं है; बल्लेबाजों को विदेशी परिस्थितियों में खुद को ढालने में असमर्थता है। उन्हें उम्मीद थी कि बीसीसीआई अपनी समीक्षा में प्रशासनिक बदलावों की जगह खिलाड़ियों की तकनीकी में सुधार और नेट सत्रों में शॉर्ट-पिच गेंदों के अभ्यास पर अधिक ध्यान देगा, ताकि टीम इंडिया को आगामी महत्वपूर्ण खेलों में फिर से अपने विश्व चैंपियन वाले रूप में देखा जा सके।