पाकिस्तान के रजाउल्लाह ने टेस्ट डेब्यू में शानदार प्रदर्शन करते हुए 63 गेंदों पर 81 रन बनाए। उन्होंने 9 छक्के जड़े और गेंद से जो रूट व जेमी स्मिथ के विकेट भी लिए।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड के खिलाफ तीसरा और आखिरी टेस्ट कई बदलावों के बीच खेला गया। टीम में सात बदलाव किए गए और इसी दौरान अनकैप्ड तेज गेंदबाज रजाउल्लाह को टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला। उस समय रजाउल्लाह के नाम केवल आठ प्रथम श्रेणी मैचों का अनुभव था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतने बड़े मंच पर यह उनका पहला मुकाबला था, लेकिन उन्होंने शुरुआत से ही अपने प्रदर्शन से यह संकेत दे दिया कि वह दबाव में खेलने से घबराने वाले खिलाड़ियों में से नहीं हैं।
गेंद से जो रूट को किया शिकार
रजाउल्लाह की मुख्य भूमिका तेज गेंदबाज की है और उन्होंने टेस्ट डेब्यू पर गेंद से भी अपनी क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट को टेस्ट क्रिकेट में अपनी चौथी ही गेंद पर पवेलियन भेज दिया। इसके बाद उन्होंने जेमी स्मिथ का विकेट भी हासिल किया। हालांकि बाद में उनकी गेंदबाजी के आंकड़े कुछ महंगे रहे, लेकिन जो रूट जैसे विश्वस्तरीय बल्लेबाज का विकेट हासिल करना उनके लिए बेहद खास उपलब्धि रही। इससे यह भी साफ हुआ कि पाकिस्तान ने उन्हें टीम में शामिल करने का फैसला केवल घरेलू प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी संभावनाओं को देखते हुए किया था।
बल्लेबाजी ने बना दिया सबसे बड़ा चर्चा का विषय
हालांकि रजाउल्लाह की असली पहचान उनके बल्ले से सामने आई। जब वह बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे, उस समय पाकिस्तान का स्कोर 312 रन पर सात विकेट था और टीम पर पारी से हार का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे मुश्किल हालात में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले बल्लेबाज से आमतौर पर संयम के साथ खेलने की उम्मीद की जाती है, लेकिन रजाउल्लाह ने इसके बिल्कुल उलट आक्रामक रुख अपनाया।
उन्होंने महज 63 गेंदों में 81 रन की तूफानी पारी खेली। इस दौरान उन्होंने नौ छक्के लगाए और इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों पर जमकर हमला बोला। इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण में जोफ्रा आर्चर, गस एटकिंसन और जोश टंग जैसे गेंदबाज मौजूद थे, लेकिन रजाउल्लाह ने किसी के खिलाफ भी डर दिखाने के बजाय अपने शॉट्स पर भरोसा किया। उनकी इस पारी ने पाकिस्तान को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
टेस्ट डेब्यू की पारी में नौ छक्कों का रिकॉर्ड
रजाउल्लाह की 81 रन की पारी केवल पाकिस्तान के लिए संकट से बाहर निकलने वाली पारी नहीं रही, बल्कि उन्होंने इस दौरान रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम दर्ज करा लिया। टेस्ट डेब्यू की एक पारी में नौ छक्के लगाकर उन्होंने इस प्रारूप में पदार्पण करने वाले बल्लेबाज द्वारा एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के रिकॉर्ड की बराबरी की।
इतनी बड़ी उपलब्धि अपने पहले ही टेस्ट मैच में हासिल करना रजाउल्लाह के लिए बेहद खास रहा। खास बात यह रही कि उन्होंने यह कारनामा उस समय किया जब पाकिस्तान की टीम दबाव में थी और सामने इंग्लैंड का मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण था।
घरेलू क्रिकेट में पहले ही दिखा चुके थे बल्लेबाजी का दम
रजाउल्लाह का यह प्रदर्शन पूरी तरह से अचानक सामने आया हुआ नहीं था। मर्दान में जन्मे इस क्रिकेटर ने नवंबर 2025 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था। घरेलू क्रिकेट में शुरुआती मुकाबलों के दौरान ही उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की क्षमता दिखाई थी। पेशावर के लिए पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने शतक भी लगाया था।
हालांकि उनकी प्राथमिक भूमिका तेज गेंदबाज की ही है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में बल्ले से दिखाई गई उनकी क्षमता ने यह साबित कर दिया था कि वह निचले क्रम में भी टीम के लिए उपयोगी योगदान दे सकते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में उन्होंने इसी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित कर दिया।
मुश्किल समय में मिला मौका
रजाउल्लाह का टेस्ट टीम में चयन भी सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ था। लॉर्ड्स में पाकिस्तान की हार के बाद टीम में बड़ा बदलाव किया गया। सात खिलाड़ियों को बाहर किया गया और दो कोचों को भी हटाया गया। इसी बदलाव के दौर में रजाउल्लाह को अचानक टेस्ट टीम में शामिल किया गया।
उनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के माहौल में खुद को ढालने के लिए ज्यादा समय नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने मैदान पर उतरकर उसी अंदाज में क्रिकेट खेला, जैसा वह घरेलू स्तर पर खेलते आए थे।
रजाउल्लाह ने कहा- मैं तेज गेंदबाजी से नहीं डरा
अपने प्रदर्शन के बाद रजाउल्लाह ने बताया कि वह इस मौके का आनंद ले रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों की ओर से मिला स्टैंडिंग ओवेशन अच्छा लगा और वह उस पल को पूरी तरह महसूस करना चाहते थे। उनकी बल्लेबाजी में भी यही बेफिक्री नजर आई।
तेज गेंदबाजी के खिलाफ अपने रवैये पर उन्होंने कहा कि वह शॉट खेलने के लिए गेंदों का चयन कर रहे थे और उन्हें लगा कि कई गेंदें उनके दायरे में थीं। उन्होंने जोफ्रा आर्चर की हार्ड लेंथ गेंदों को भी निशाना बनाने की कोशिश की। उनका मानना था कि जब कोई खिलाड़ी अपने देश के लिए खेल रहा हो तो उसे तेज गेंदबाजी से डरने की जरूरत नहीं है।
रजाउल्लाह का टेस्ट डेब्यू इसलिए भी खास बन गया क्योंकि उन्होंने एक ही मुकाबले में गेंद और बल्ले दोनों से अपनी प्रतिभा दिखाई। जो रूट और जेमी स्मिथ के विकेट के साथ 81 रन की विस्फोटक पारी ने उन्हें पाकिस्तान क्रिकेट के नए चेहरों में शामिल कर दिया है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इस शुरुआत को निरंतर प्रदर्शन में बदलने की होगी।