आरबीआई की मौद्रिक नीति के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद। बाजार के हाल और गिरावट के मुख्य कारणों के बारे में जानें।
शुक्रवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा। सुबह के सत्र में बाजार में अच्छी तेजी देखी गई थी, लेकिन दोपहर होते-होते निवेशकों की सतर्कता और मुनाफे की वसूली (profit-booking) के चलते बाजार अपनी शुरुआती बढ़त को गंवा बैठा और लाल निशान में कारोबार करने लगा। हालांकि आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति में राहत दी है और सरकार ने एफपीआई (FPI) के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स में छूट का ऐलान किया है, लेकिन इन सकारात्मक खबरों के बावजूद बाजार में बिकवाली का दबाव हावी रहा।
आरबीआई की नीति और बाजार की प्रतिक्रिया
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC), जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं, ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। साथ ही, नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा गया है। बाजार को उम्मीद थी कि इस घोषणा के बाद बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में जबरदस्त उछाल आएगा, जैसा कि सुबह के सत्र में देखने को मिला। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों ने आरबीआई द्वारा दी गई महंगाई और विकास के आंकड़ों पर विचार किया और मुनाफा वसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार का उत्साह कम हो गया।
आईटी और मेटल सेक्टर में जोरदार बिकवाली
दोपहर के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और मेटल शेयरों पर देखा गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और एचसीएल टेक (HCLTech) जैसे दिग्गजों में भारी बिकवाली देखी गई। वहीं, मेटल सेक्टर की स्थिति और भी खराब रही, जहां निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.17 प्रतिशत लुढ़क गया। वैश्विक स्तर पर विकास को लेकर चिंताओं और कमोडिटी की मांग में कमी के अनुमानों ने इन क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया। निफ्टी सीमेंट और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजारों (Broader Markets) का हाल
बिकवाली का असर केवल बेंचमार्क शेयरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजारों (broader markets) में भी कमजोरी दिखी। निफ्टी मिडकैप 100 और मिडकैप 50 दोनों में 0.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। वहीं, स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.39 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। यह संकेत देता है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का रास्ता चुना है।
बैंकिंग और डिफेंसिव सेक्टर की चमक
बाजार की समग्र गिरावट के बावजूद बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने काफी मजबूती दिखाई। निफ्टी बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ स्थिर बने रहे। खास बात यह रही कि सरकारी बैंकों (PSU Bank) ने बाजार को सहारा देने का काम किया और इनका इंडेक्स 0.19 प्रतिशत ऊपर बना रहा। आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) में अच्छी खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को बड़ी गिरावट से बचने में मदद मिली।
इसके अलावा, निवेशक ‘डिफेंसिव’ सेक्टर की ओर रुख करते हुए नजर आए। निफ्टी हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में सकारात्मक रुझान रहा। रियल एस्टेट (Nifty Realty) में भी बढ़त दर्ज की गई, जबकि मीडिया इंडेक्स 2.19 प्रतिशत के उछाल के साथ बाजार में सबसे मजबूत सेक्टर बना रहा। भारत का ‘वोलाटिलिटी इंडेक्स’ (India VIX) भी लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 16.04 पर पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ती घबराहट और बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है।
विदेशी मुद्रा बाजार और आरबीआई के कदम
बाजार के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह रही कि आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष के दबाव को देखते हुए पूंजी प्रवाह (capital inflows) को बढ़ावा देने के लिए पांच प्रमुख उपायों की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट देने का निर्णय लिया है। इसका सकारात्मक असर मुद्रा बाजार पर दिखा, जहां रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 54 पैसे की मजबूती के साथ 95.24 के स्तर पर रिकवर कर गया।
कुल मिलाकर, बाजार एक ‘क्रॉसरोड्स’ पर खड़ा है, जहां एक ओर नीतिगत स्थिरता का स्वागत हो रहा है, तो दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितताएं मुनाफा वसूली के लिए प्रेरित कर रही हैं। निवेशकों की नजर अब आगामी सत्रों में इस बात पर होगी कि क्या बाजार अपनी पुरानी लय वापस पा सकेगा या अस्थिरता का यह दौर कुछ समय और जारी रहेगा।