भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार दोपहर बिकवाली बढ़ गई। बैंकिंग, FMCG और IT शेयरों में मुनाफावसूली से निफ्टी 24,500 के नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक टूट गया।
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में दोपहर के कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ गया। सोमवार की तेज़ तेजी के बाद निवेशकों ने बैंकिंग, एफएमसीजी (FMCG) और आईटी (IT) सेक्टर के शेयरों में मुनाफावसूली (Profit Booking) की, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला। दोपहर 1:35 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 326.43 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,312.60 पर कारोबार कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी 308.10 अंक यानी 1.24 प्रतिशत टूटकर 24,466.20 पर पहुंच गया।
निफ्टी ने दिन की शुरुआत 24,703.90 के स्तर से की थी, लेकिन कारोबार के दौरान लगातार बिकवाली के चलते यह 24,500 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
बैंकिंग और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
मंगलवार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग और आईटी सेक्टर का रहा। निफ्टी बैंक 1.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 1.30 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली का असर इसलिए भी अधिक देखने को मिला क्योंकि पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में इस सेक्टर में अच्छी तेजी आई थी। निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा बुक करना बेहतर समझा, जिससे इंडेक्स नीचे आ गया।
वहीं, आईटी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता का असर इस सेक्टर पर पड़ा।
FMCG सेक्टर भी नहीं बचा
रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनियों यानी FMCG सेक्टर के शेयर भी दबाव में रहे। आमतौर पर यह सेक्टर बाजार में स्थिरता का संकेत माना जाता है, लेकिन मंगलवार को यहां भी बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने सुरक्षित मुनाफा निकालने की रणनीति अपनाई, जिसका असर FMCG कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया।
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी
सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार (Broader Market) में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, बड़े सूचकांकों की तुलना में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही।
निफ्टी 100 में 1.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी 200 करीब 1.01 प्रतिशत कमजोर रहा।
निफ्टी 500 लगभग 0.85 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।
यह संकेत देता है कि बिकवाली केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर बाजार के अधिकांश हिस्सों में दिखाई दिया।
सोमवार की तेजी के बाद स्वाभाविक रही मुनाफावसूली
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को आई तेज तेजी के बाद मंगलवार की गिरावट को सामान्य मुनाफावसूली के रूप में देखा जा सकता है। जब किसी कारोबारी सत्र में बाजार तेज़ी से ऊपर जाता है, तो अगले सत्र में कई निवेशक अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचते हैं।
इसी वजह से बाजार पर दबाव बना और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक संकेतों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की आगे की दिशा केवल घरेलू कारकों से नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम से भी तय होगी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीद-बिक्री, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बाजारों का रुख और वैश्विक आर्थिक आंकड़े निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा, Closing Auction Session (CAS) लागू होने के बाद बाजार नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को समायोजित कर रहा है। इसलिए शुरुआती दिनों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
किस स्तर पर रहेगी निवेशकों की नजर?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इसके नीचे फिसलने के बाद अब बाजार की नजर अगले सपोर्ट स्तरों पर रहेगी। यदि बिकवाली का दबाव जारी रहता है, तो निफ्टी में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
दूसरी ओर, यदि बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटती है, तो सूचकांक दोबारा 24,500 के ऊपर टिकने की कोशिश कर सकता है।
क्या करें निवेशक?
बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराकर जल्दबाजी में फैसले न लें। मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में लंबी अवधि का निवेश अभी भी बेहतर रणनीति माना जा रहा है।
साथ ही, ट्रेडर्स को जोखिम प्रबंधन (Risk Management) का विशेष ध्यान रखने और बाजार की अस्थिरता के दौरान उचित स्टॉप-लॉस का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
मंगलवार की दोपहर तक बाजार में कमजोरी जरूर देखने को मिली, लेकिन इसे फिलहाल बड़े ट्रेंड में बदलाव की बजाय सामान्य मुनाफावसूली के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले कारोबारी सत्रों में कॉर्पोरेट नतीजे, वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और आर्थिक संकेतक भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक रहता है और घरेलू निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है, तो बाजार दोबारा मजबूती की ओर लौट सकता है।