भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को सतर्क शुरुआत की। निफ्टी 160 अंकों से अधिक गिरा, जबकि सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला। निवेशकों की नजर Closing Auction Session (CAS) के प्रभाव और बाजार की दिशा पर बनी हुई है।
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सतर्क रुख के साथ हुई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया, जबकि बीएसई सेंसेक्स ने हल्की मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। निवेशकों की निगाहें विशेष रूप से Closing Auction Session (CAS) लागू होने के बाद बाजार की नई चाल और नकद (Cash) तथा डेरिवेटिव (Derivatives) बाजार के बीच बनने वाले संतुलन पर टिकी रहीं।
करीब सुबह 9:25 बजे, निफ्टी 50 लगभग 161 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,613 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 173 अंकों की बढ़त के साथ 78,813 के स्तर पर पहुंच गया।
CAS लागू होने के बाद पहला पूरा कारोबारी सत्र
सोमवार से F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) शेयरों के लिए Closing Auction Session (CAS) लागू किया गया है। मंगलवार इसका पहला पूरा कारोबारी सत्र रहा, इसलिए निवेशक और बाजार विशेषज्ञ इस नई प्रणाली के प्रभाव का बारीकी से आकलन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार के क्लोजिंग ऑक्शन के बाद कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के भावों के बीच संतुलन (Alignment) बनाने की प्रक्रिया जारी है। इसी वजह से शुरुआती कारोबार में निफ्टी पर दबाव दिखाई दिया।
नई व्यवस्था के तहत क्लोजिंग प्राइस अब एक विशेष ऑक्शन प्रक्रिया से तय किया जाता है, जिससे मूल्य निर्धारण अधिक पारदर्शी और वास्तविक मांग-आपूर्ति के आधार पर हो सके।
निफ्टी में गिरावट की क्या है वजह?
बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी में शुरुआती गिरावट का प्रमुख कारण तकनीकी समायोजन (Technical Adjustment) और डेरिवेटिव पोजिशन में बदलाव है।
CAS लागू होने के बाद कई ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशक अपने पोर्टफोलियो और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स को नए क्लोजिंग प्राइस के अनुसार समायोजित कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया का असर निफ्टी के शुरुआती कारोबार में देखने को मिला।
हालांकि विशेषज्ञ इसे सामान्य बाजार प्रक्रिया मान रहे हैं और इसे किसी बड़े नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं देख रहे।
सेंसेक्स ने दिखाई मजबूती
जहां एक ओर निफ्टी दबाव में रहा, वहीं बीएसई सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई। सेंसेक्स लगभग 173 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।
इसका संकेत है कि बाजार के कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी बनी हुई है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा ब्लूचिप कंपनियों में निवेशकों की रुचि देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स को समर्थन मिला।
निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर भी
घरेलू कारकों के अलावा निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों पर भी बनी हुई है। अमेरिका और अन्य प्रमुख बाजारों से आने वाले आर्थिक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में भी दिन के दूसरे हिस्से में उतार-चढ़ाव सीमित रह सकता है।
Closing Auction Session से क्या बदल रहा है?
NSE द्वारा लागू किया गया Closing Auction Session भारतीय शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। इसका उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी बनाना और अंतिम समय में कृत्रिम उतार-चढ़ाव को कम करना है।
नई व्यवस्था में बाजार बंद होने के बाद एक निश्चित अवधि तक खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं और फिर ऐसा मूल्य तय किया जाता है, जहां सबसे अधिक लेन-देन संभव हो। यही कीमत आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस बनती है।
इस प्रणाली का सबसे अधिक प्रभाव F&O शेयरों और डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर पड़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि CAS लागू होने के शुरुआती दिनों में कुछ तकनीकी समायोजन और अस्थिरता देखी जा सकती है। लेकिन लंबी अवधि में यह प्रणाली बाजार को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएगी।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल शुरुआती उतार-चढ़ाव के आधार पर जल्दबाजी में निवेश निर्णय न लें। नई व्यवस्था को समझना और उसके अनुसार रणनीति बनाना अधिक लाभदायक होगा।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। घरेलू आर्थिक आंकड़े, कॉर्पोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों का रुख, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और CAS के प्रभाव का मूल्यांकन बाजार की चाल तय करेंगे।
फिलहाल शुरुआती कारोबार यह संकेत दे रहा है कि निवेशक सतर्क हैं और नई ट्रेडिंग व्यवस्था के प्रभाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं। यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं और घरेलू बाजार में विश्वास कायम रहता है, तो आने वाले सत्रों में बाजार धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।