पश्चिम एशिया में तनाव और ब्रेंट क्रूड के $95 प्रति बैरल पार पहुंचने से भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी के संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी 95 अंक नीचे कारोबार कर रहा है। जानिए आज निफ्टी के अहम टेक्निकल लेवल्स और बाजार पर दबाव के बड़े कारण।
गुरुवार, 23 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण वैश्विक बाजारों का रुख नकारात्मक बना हुआ है, जिसका सीधा असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर पड़ा है।
कारोबार की शुरुआत से पहले गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से मिले संकेतों ने भारतीय बाजार के लिए एक गैप-डाउन (Gap-down) शुरुआत की ओर इशारा किया था। सुबह 7:58 बजे गिफ्ट निफ्टी करीब 95 अंक या 0.40% की गिरावट के साथ 23,866.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी 50 (Nifty 50) की सुस्त शुरुआत को दर्शा रहा था।
बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?
निवेशकों की धारणा में यह सतर्कता तब आई जब यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले की खबरें सामने आईं। इस घटना ने वैश्विक तेल आपूर्ति में नए सिरे से बाधा उत्पन्न होने की चिंता पैदा कर दी है।
इस ताजा घटनाक्रम के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $95 प्रति बैरल के पार निकल गया है, जबकि WTI क्रूड $88 के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल में आई इस उछाल ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) और सख्त मौद्रिक नीतियों (Tighter Monetary Policy) की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए कच्चे तेल का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट मुनाफे और भारतीय रुपये के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है।
कच्चे तेल की तेजी और रुपये की कमजोरी बढ़ाएगी अस्थिरता
एनरिच मनी (Enrich Money) के सीईओ पोन्मुडी आर (Ponmudi R) का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से भारतीय इक्विटी बाजारों पर दबाव बना रहेगा।
पोन्मुडी आर ने बाजार के दृष्टिकोण पर बात करते हुए कहा:
“मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल कीमतों को बढ़ा दिया है और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। ऊंचे तेल मूल्यों और भारतीय रुपये पर लगातार दबाव का संयोजन निवेशकों को सतर्क रखेगा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलकर ₹96.5 के स्तर के करीब पहुंच गया है।”
वैश्विक कारकों के अलावा, निवेशक यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के नीतिगत निर्णय और अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे। वहीं घरेलू मोर्चे पर, बाजार बंद होने के बाद आने वाले इन्फोसिस (Infosys) की पहली तिमाही के नतीजों पर भी आईटी सेक्टर के परिदृश्य के लिए नजरें टिकी रहेंगी।
निफ्टी 50 का टेक्निकल दृष्टिकोण (Technical Outlook)
तकनीकी चार्ट्स पर, निफ्टी के 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलने के बाद निकट अवधि का ढांचा कमजोर नजर आ रहा है।
पोन्मुडी आर के अनुसार निफ्टी के प्रमुख स्तर इस प्रकार हैं:
- प्रतिरोध स्तर (Resistance Levels): निफ्टी के लिए तत्काल रुकावट 24,200 का स्तर है। इसके बाद 24,300-24,400 का दायरा (जो कि 200-दिवसीय EMA के करीब है) एक मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम करेगा। यदि इंडेक्स इसके ऊपर टिकता है, तो तेजी का रुख 24,500-24,600 तक जा सकता है।
- सपोर्ट स्तर (Support Levels): नीचे की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23,900-23,800 के दायरे में है। सत्र की शुरुआत में 24,000 के स्तर को दोबारा हासिल करना बाजार में स्थिरता का पहला संकेत होगा, जबकि इसके नीचे लगातार बने रहने से गिरावट का खतरा बना रहेगा।
भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद एशियाई बाजारों में मजबूती
पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद, गुरुवार को अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी का माहौल देखा गया। अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों (अल्फाबेट और टेस्ला) द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर मजबूत खर्च के अनुमानों ने सेमीकंडक्टर और टेक शेयरों को सहारा दिया।
- जापान का निकेई (Nikkei): लगभग 1% चढ़ा।
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi): सेमीकंडक्टर कंपनियों (SK हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स) में तेजी के दम पर 3% से ज्यादा उछला।
- MSCI एशिया-पैसिफिक इंडेक्स (जापान छोड़कर): करीब 1% मजबूत हुआ।
हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व के विस्तृत होते संघर्ष के कारण एशियाई बाजारों की इस बढ़त पर भी कुछ हद तक सीमित असर देखा गया।