SS Mota Singh School मामले में सौरभ भारद्वाज ने गंभीर सवाल उठाए। यौन उत्पीड़न की सूचना DOE को न देने, CCTV बंद होने और POCSO ट्रेनिंग की कमी के आरोप।
SS Mota Singh School से जुड़े कथित नियम उल्लंघन और प्रबंधन की लापरवाही के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में कई गंभीर अनियमितताओं के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
यौन उत्पीड़न की जानकारी न देने का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने कथित यौन उत्पीड़न की घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय (DOE) को समय पर नहीं दी। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में ऐसी जानकारी छिपाना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
CCTV बंद होने और POCSO ट्रेनिंग पर सवाल
एसएस मोटा सिंह स्कूल से जुड़े गंभीर नियमों के उल्लंघन और प्रबंधन की लापरवाही के बावजूद अब तक FIR नहीं हुई।
शिक्षा निदेशालय को यौन उत्पीड़न की सूचना न देना, CCTV बंद होना, अध्यापकों को mandatory POCSO प्रशिक्षण का अभाव और बिना DOE अनुमति के रेजिडेंशियल बिल्डिंग से स्कूल संचालन… pic.twitter.com/zc9mICqzkk
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 23, 2026
उन्होंने स्कूल परिसर में CCTV कैमरों के बंद होने को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
इसके अलावा, स्कूल के शिक्षकों के लिए अनिवार्य POCSO प्रशिक्षण नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाले कानून के तहत जागरूकता और प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माना जाता है।
आवासीय भवन में स्कूल संचालन का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल कथित तौर पर DOE की अनुमति के बिना एक आवासीय भवन से संचालित किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा नियमों के अनुसार जांच और कार्रवाई की आवश्यकता है।
उन्होंने सवाल किया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अभी तक FIR क्यों दर्ज नहीं हुई और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले में अब शिक्षा विभाग और संबंधित जांच एजेंसियों की भूमिका पर निगाहें टिकी हैं। आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।