दांपत्य जीवन में चाहते हैं खुशहाली? सीता नवमी के दिन राम-जानकी का इस विधि से करें पूजन, चमक जाएगी किस्मत

दांपत्य जीवन में चाहते हैं खुशहाली? सीता नवमी के दिन राम-जानकी का इस विधि से करें पूजन, चमक जाएगी किस्मत

सीता नवमी पर माता जानकी की कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कैसे माता सीता की पूजा से घर में आती है सुख-समृद्धि।

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी (Sita Navami) के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष यह उत्सव 26 अप्रैल 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा।

माता सीता को साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में माता जानकी की पूजा होती है, वहां सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का वास होता है। यदि आप भी आर्थिक तंगी से परेशान हैं या घर में कलह का माहौल रहता है, तो सीता नवमी के दिन कुछ विशेष उपाय करना आपके लिए कल्याणकारी साबित हो सकता है।

सीता नवमी का महत्व

सीता नवमी को ‘जानकी नवमी’ भी कहा जाता है। रामायण के अनुसार, मिथिला के राजा जनक जब यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल चला रहे थे, तब उन्हें भूमि से एक कलश प्राप्त हुआ, जिसमें माता सीता शिशु रूप में विराजमान थीं। चूंकि वे भूमि से प्रकट हुई थीं, इसलिए उन्हें ‘भूमिपुत्री’ भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य और परिवार को समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

सुख-समृद्धि के लिए सीता नवमी पर करें ये काम (Special Remedies)

1. श्री राम-सीता का संयुक्त पूजन:

सीता नवमी के दिन केवल माता सीता की नहीं, बल्कि भगवान राम और माता जानकी की संयुक्त पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान “ॐ श्री सीतायै नमः” और “ॐ रामाय नमः” मंत्रों का जाप करें। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और घर की नकारात्मकता दूर होती है।

2. पीले फूलों और श्रृंगार का अर्पण:

माता सीता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इस दिन माता को पीले रंग के वस्त्र, पीले फूल और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। बाद में यह श्रृंगार किसी सुहागिन महिला को दान कर दें। ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

3. ‘श्री सूक्त’ का पाठ:

चूंकि माता सीता लक्ष्मी का अवतार हैं, इसलिए इस दिन श्री सूक्त का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। शाम के समय घी का दीपक जलाकर इसका पाठ करने से धन आगमन के मार्ग खुलते हैं और दरिद्रता का नाश होता है।

4. भूमि दान या वृक्षारोपण:

माता सीता भूमिपुत्री हैं, इसलिए इस दिन मिट्टी से जुड़ा कोई भी काम जैसे पौधे लगाना या सामर्थ्य अनुसार भूमि दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे कुंडली में मंगल और शुक्र की स्थिति मजबूत होती है।

सीता नवमी पूजन का शुभ मुहूर्त (2026)

  • नवमी तिथि प्रारंभ: 25 अप्रैल 2026 को रात 10:45 बजे से।
  • नवमी तिथि समाप्त: 26 अप्रैल 2026 को रात 11:30 बजे तक।
  • पूजा का सबसे उत्तम समय: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक।

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