आज है प्रदोष व्रत: महादेव की कृपा पाने का महापर्व; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

आज है प्रदोष व्रत: महादेव की कृपा पाने का महापर्व; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

आज है प्रदोष व्रत! जानें महादेव की पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त, विधि और महत्व। बुध प्रदोष के इस विशेष उपाय से दूर होगी जीवन की हर बाधा।

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अत्यंत विशेष महत्व है। प्रत्येक माह के त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित यह व्रत रखा जाता है। आज प्रदोष व्रत है और शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में महादेव की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

चूंकि आज का व्रत बुधवार के दिन पड़ा है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। बुध प्रदोष का व्रत विशेष रूप से सुख-शांति और ज्ञान की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त (15 अप्रैल 2026)

आज वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है:

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 अप्रैल 2026, रात 08:30 बजे से
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 अप्रैल 2026, रात 09:15 बजे तक
  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:45 बजे से रात 08:55 बजे तक

पूजन विधि (Puja Vidhi)

प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में करना सबसे उत्तम माना जाता है।

  • स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें।
  • शिव मंदिर दर्शन: दिनभर निराहार रहें या फलाहार करें। शाम को सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान करें।
  • महादेव का अभिषेक: शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  • सामग्री अर्पण: महादेव को बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल, अक्षत (बिना टूटे चावल) और भस्म अर्पित करें।
  • प्रदोष व्रत कथा: धूप-दीप जलाकर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
  • आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में शिव जी की आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।

प्रदोष व्रत का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय महादेव अत्यंत दयालु होते हैं और छोटी सी सेवा से भी प्रसन्न हो जाते हैं।

  • बुध प्रदोष करने से संतान पक्ष को लाभ मिलता है।
  • करियर और शिक्षा में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • जीवन में आरोग्यता और सुख-समृद्धि का वास होता है।

Related posts

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री 2026: गणपति बप्पा की पूजा के लिए A to Z पूरी लिस्ट

घर की नेमप्लेट के लिए लकड़ी, मेटल या पत्थर? जानें वास्तु के अनुसार कौन-सा है शुभ

वराह जयंती 2026 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More