डेटिंग का नया टॉक्सिक ट्रेंड ‘श्रेकिंग’ (Shrekking): क्या अपने पार्टनर को कम आंककर रिश्ता बनाना सही है?

डेटिंग का नया टॉक्सिक ट्रेंड 'श्रेकिंग' (Shrekking): क्या अपने पार्टनर को कम आंककर रिश्ता बनाना सही है?

 

डेटिंग की दुनिया में नया ट्रेंड ‘श्रेकिंग’ क्या है? क्यों लोग अपने से कम स्टैंडर्ड वाले पार्टनर को डेट कर रहे हैं और यह क्यों टॉक्सिक है? जानें पूरी सच्चाई।

आधुनिक डेटिंग की दुनिया आज पूरी तरह से बदल चुकी है। सोशल मीडिया के इस दौर में हर दिन नए डेटिंग शब्द और ट्रेंड्स सामने आते हैं, जो हमारे रिश्तों के समीकरणों को प्रभावित करते हैं। इन्हीं में से एक शब्द आजकल काफी चर्चा में है—’श्रेकिंग’ (Shrekking)। सुनने में यह किसी एनिमेटेड फिल्म के किरदार जैसा फनी लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की मनोवैज्ञानिक सच्चाई काफी गहरी और चिंताजनक है। यदि आप डेटिंग ऐप का उपयोग करते हैं या आजकल के रिलेशनशिप पैटर्न्स को फॉलो कर रहे हैं, तो ‘श्रेकिंग’ के बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।

क्या है ‘श्रेकिंग’ (Shrekking) का असली मतलब?

‘श्रेकिंग’ का अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति को जानबूझकर डेट करना है, जिसे आप अपने सामाजिक, शारीरिक या आर्थिक स्तर (Standard) से काफी कम या निम्न मानते हैं। इस ट्रेंड को मशहूर एनिमेटेड फिल्म ‘श्रेक’ (Shrek) से लिया गया है। इसके पीछे की साइकोलॉजी यह होती है कि यदि आप अपने पार्टनर को अपने से ‘कमतर’ आंकते हैं, तो रिश्ते में हमेशा ‘अपर हैंड’ (ऊपरी हाथ) आपका रहेगा।

इस ट्रेंड को फॉलो करने वाले लोग अक्सर असुरक्षा की भावना से ग्रस्त होते हैं। वे सोचते हैं कि यदि उनका पार्टनर उनसे कम आकर्षक या कम सफल है, तो वह रिश्ता खत्म करने की हिम्मत नहीं करेगा और हमेशा उनकी प्रशंसा करेगा। उन्हें लगता है कि सामने वाला व्यक्ति उनके साथ जुड़कर खुद को ‘खुशनसीब’ महसूस करेगा और उनकी हर बात मानेगा। इस टर्म का दूसरा पहलू है ‘Get Shrekked’, जिसका मतलब है कि जिस व्यक्ति को आपने अपनी सुरक्षा के लिए चुना था, उसी ने आपको धोखा दे दिया या छोड़ दिया।

लोग ‘श्रेकिंग’ क्यों ट्राई कर रहे हैं?

आज के दौर में ‘सीरियस कमिटमेंट’ में आना एक बड़ी चुनौती बन गया है। लोगों के पास इतने अधिक डेटिंग ऑप्शन्स हैं कि वे हमेशा ‘बेहतर’ की तलाश में रहते हैं, जिससे रिश्तों में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे में जो व्यक्ति रिलेशनशिप में ज्यादा भावुक या सीरियस होता है, उसे दिल टूटने का डर हमेशा सताता रहता है।

लोग खुद को ‘इमोशनल डैमेज’ से बचाने के लिए एक डिफेंस मैकेनिज्म (सुरक्षा तंत्र) के रूप में श्रेकिंग का सहारा लेते हैं। उनका मानना है कि यदि वे अपने से कम स्टैंडर्ड वाले व्यक्ति के साथ रहेंगे, तो उन्हें खोने का डर नहीं रहेगा और उनका दिल नहीं टूटेगा। इसके अलावा, कुछ लोगों के लिए यह ईगो बूस्ट का जरिया भी है। किसी ऐसे व्यक्ति के साथ होना जिसे वे खुद से कम आंकते हैं, उन्हें रिश्ते में ‘सुपीरियर’ होने का झूठा एहसास दिलाता है, जिससे उनके अहंकार को संतुष्टि मिलती है।

क्या यह डेटिंग ट्रेंड सही है?

साफ शब्दों में कहें तो, ‘श्रेकिंग’ एक बेहद टॉक्सिक (जहरीला) डेटिंग ट्रेंड है। भले ही यह शुरुआत में आपके ईगो को संतुष्ट करे, लेकिन लंबे समय में यह आपके पार्टनर की मानसिक सेहत और आपके खुद के व्यक्तित्व के लिए बहुत नुकसानदेह है।

  • सम्मान का अभाव: किसी भी रिश्ते की बुनियाद आपसी सम्मान (Mutual Respect) पर टिकी होती है। यदि आप अपने पार्टनर को मन ही मन कम आंकते हैं, तो आप उन्हें कभी भी वह बराबरी का दर्जा या इज्जत नहीं दे पाएंगे जो एक स्वस्थ रिश्ते के लिए अनिवार्य है।
  • आत्मसम्मान को ठेस: जब आप किसी को यह महसूस कराते हैं कि वह आपसे ‘नीचे’ है, तो आप अनजाने में उनके आत्मसम्मान (Self-Esteem) को चोट पहुँचा रहे होते हैं। यह इमोशनल एब्यूज का ही एक रूप है, जो सामने वाले व्यक्ति के आत्मविश्वास को पूरी तरह खत्म कर सकता है।
  • रिश्ते में कड़वाहट: ‘श्रेकिंग’ पर आधारित रिश्ता कभी भी एक सुखद अंत की ओर नहीं ले जाता। जब पार्टनर को इस बात का अहसास होता है कि उसे सिर्फ एक सुरक्षा कवच या ईगो बूस्ट के लिए इस्तेमाल किया गया है, तो रिश्ता बहुत बुरे टर्म्स पर टूटता है। इससे सामने वाले व्यक्ति के मन में आपके प्रति गहरा गुस्सा और कड़वाहट भर जाती है।

 प्यार का सौदा नहीं, सम्मान जरूरी है

रिश्ते में सुरक्षा की तलाश करना स्वाभाविक है, लेकिन किसी को छोटा दिखाकर खुद को बड़ा महसूस करना प्यार नहीं है। एक स्वस्थ रिश्ता वही है जहाँ दो लोग अपनी कमियों और खूबियों के साथ एक-दूसरे को बराबर समझें। यदि आप अपने पार्टनर से प्यार नहीं करते या उन्हें अपने बराबर नहीं मानते, तो उनसे जुड़ना न केवल आपके लिए, बल्कि उनके लिए भी अन्याय है।

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