लेखिका शोभा डे ने सोनम वांगचुक के समर्थन में सलमान खान के ‘It’s Done, Bro’ पोस्ट को ‘क्रिंज’ बताया। अपने लेख में उन्होंने बॉलीवुड के कई सितारों पर Gen Z से कटे होने और युवाओं की भावनाओं को न समझने का आरोप लगाया।
प्रसिद्ध लेखिका और कॉलमिस्ट शोभा डे ने बॉलीवुड की मौजूदा कार्यशैली और युवाओं से उसके कमजोर होते जुड़ाव पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने विशेष रूप से अभिनेता सलमान खान के उस सोशल मीडिया पोस्ट की आलोचना की, जो उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान लिखा था। शोभा डे का कहना है कि बॉलीवुड के कई बड़े सितारे आज की Gen Z की सोच, भावनाओं और सामाजिक आंदोलनों को समझने में असफल रहे हैं।
अपने लेख में उन्होंने यह भी कहा कि जिन सितारों की लोकप्रियता युवा दर्शकों पर निर्भर करती है, वही सितारे आज युवाओं की भावनाओं से पूरी तरह कटे हुए दिखाई देते हैं। उनके अनुसार, यह दूरी बॉलीवुड की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों को प्रभावित कर रही है।
सलमान खान के पोस्ट पर साधा निशाना
शोभा डे ने विशेष रूप से सलमान खान के उस इंस्टाग्राम पोस्ट का जिक्र किया जिसमें उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए लिखा था, “Sonam, it’s done, bro. Don’t extend this… If you want, I will send food from home.”
डे ने इस पोस्ट को “क्रिंज” बताते हुए कहा कि शायद सलमान खान ने इसे आधुनिक और दोस्ताना अंदाज में लिखने की कोशिश की, लेकिन यह संदेश युवाओं के बीच सराहना पाने के बजाय मजाक का विषय बन गया। उनके अनुसार, “ब्रॉ” जैसे संबोधन और घर का खाना भेजने की पेशकश उस समय आंदोलन की गंभीरता के अनुरूप नहीं थी।
उन्होंने लिखा कि आज की Gen Z “कूल” होने की परिभाषा खुद तय करती है और केवल लोकप्रिय अभिनेता होने से कोई व्यक्ति युवाओं के बीच प्रभावशाली नहीं बन जाता।
अन्य बॉलीवुड सितारों पर भी उठाए सवाल
शोभा डे ने अपने लेख में केवल सलमान खान ही नहीं, बल्कि कंगना रनौत, हेमा मालिनी और अनुपम खेर की टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन कलाकारों ने Gen Z के आंदोलन और उसकी भावनाओं को समझने के बजाय ऐसे बयान दिए, जिनसे युवाओं में नाराजगी बढ़ी।
उन्होंने लिखा कि इन सितारों की प्रतिक्रियाएं युवाओं को प्रभावित करने के बजाय उन्हें और दूर ले गईं। डे के अनुसार, आज के युवा किसी सेलिब्रिटी की मंजूरी या समर्थन का इंतजार नहीं करते, बल्कि अपनी सोच और फैसलों के आधार पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय बनाते हैं।
‘ChatGPT स्क्रिप्टेड पोस्ट’ वाली टिप्पणी
शोभा डे ने अपने लेख में एक और विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बॉलीवुड सितारों के सोशल मीडिया पोस्ट ऐसे लग रहे थे जैसे वे “ChatGPT-scripted” हों। उनका आशय यह था कि इन पोस्टों में व्यक्तिगत सोच या संवेदनशीलता कम और औपचारिक या तैयार किया गया संदेश अधिक दिखाई देता है।
उन्होंने यह भी लिखा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ कलाकारों ने राजनीतिक संकेत मिलने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
Gen Z को नहीं चाहिए सेलिब्रिटी समर्थन
अपने लेख में शोभा डे ने कहा कि आज की पीढ़ी पहले की तुलना में कहीं अधिक स्वतंत्र सोच रखती है। उन्होंने लिखा कि अब समय बदल चुका है और Gen Z को किसी फिल्मी सितारे के समर्थन की जरूरत नहीं है। बल्कि अब स्थिति उलट गई है, जहां सेलिब्रिटी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए युवाओं से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उनके अनुसार, आज के युवा अपने विचारों, आंदोलनों, संगीत और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे किसी भी मुद्दे पर अपनी राय बनाने के लिए केवल प्रसिद्ध चेहरों पर निर्भर नहीं रहते।
सोशल मीडिया के दौर में बदल चुका है प्रभाव का समीकरण
डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने संवाद और प्रभाव के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां किसी सामाजिक मुद्दे पर सेलिब्रिटी का समर्थन बड़ी बात माना जाता था, वहीं अब आम नागरिक, कंटेंट क्रिएटर और युवा समूह भी बड़े पैमाने पर जनमत तैयार करने में सक्षम हैं।
शोभा डे का मानना है कि यदि बॉलीवुड को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखनी है, तो उसे युवाओं की भाषा, सोच और संवेदनाओं को समझना होगा। केवल लोकप्रियता या स्टारडम के भरोसे नई पीढ़ी का विश्वास हासिल करना अब आसान नहीं रहा।
बदलते समय में बॉलीवुड के लिए संदेश
शोभा डे का यह लेख केवल कुछ कलाकारों की आलोचना नहीं, बल्कि पूरे फिल्म उद्योग के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी अधिक जागरूक, मुखर और स्वतंत्र है। ऐसे में फिल्मी सितारों को भी सामाजिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते समय अधिक संवेदनशील, प्रामाणिक और जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा।
यद्यपि उनके विचार व्यक्तिगत हैं और इनसे सभी सहमत हों, यह आवश्यक नहीं है, लेकिन उनके लेख ने बॉलीवुड, सोशल मीडिया और Gen Z के बदलते रिश्ते पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।