Nana Patekar Death: नाना पाटेकर का पुराना इंटरव्यू वायरल, बोले- ‘हमें अपने लिए जीने का वक्त ही नहीं मिला’

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर का पुराना इंटरव्यू वायरल, बोले- ‘हमें अपने लिए जीने का वक्त ही नहीं मिला’

 

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका पुराना इंटरव्यू चर्चा में है। अभिनेता ने जिंदगी, अभिनय और कलाकार की दुनिया पर बात करते हुए कहा था कि उन्हें अपने लिए जीने का समय नहीं मिला।

नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। नाना पाटेकर अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग अंदाज के लिए जाने जाते थे। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई ऐसी भूमिकाएं निभाईं, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। उनके निधन के बीच अब अभिनेता का एक पुराना इंटरव्यू चर्चा में आ गया है। करीब दो साल पहले दिए गए इस इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने जिंदगी, अभिनय और कलाकार की दुनिया को लेकर बेहद गहरी बातें कही थीं। उनके विचार अब उनके जाने के बाद और भी भावुक कर देने वाले लग रहे हैं।

नाना पाटेकर ने जिंदगी को लेकर कही थी बड़ी बात

लल्लनटॉप को दिए एक पुराने इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने अपनी जिंदगी और कलाकार के तौर पर अपने अनुभवों के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी वास्तव में उनकी अपनी नहीं रही। अभिनेता के मुताबिक, कलाकार लगातार अलग-अलग किरदारों को जीता रहता है और इसी दौरान कई बार अपनी निजी जिंदगी के लिए समय ही नहीं निकाल पाता। उन्होंने कहा था कि इंसान दूसरों के लिए जीते-जीते इस तरह अभ्यस्त हो जाता है कि उसे खुद के लिए रुकने और सोचने का मौका नहीं मिल पाता।

नाना पाटेकर ने बताया था कि आज एक किरदार की जिंदगी जीनी होती है और कल कोई दूसरा किरदार सामने होता है। उनके अनुसार, शायद किसी दिन इंसान रुककर खुद के बारे में सोचने लगे, लेकिन वह दिन अक्सर आता ही नहीं। धीरे-धीरे यही जिंदगी जीने का तरीका बन जाता है। उनके इस विचार में एक कलाकार के संघर्ष और निजी जीवन के बीच का अंतर साफ नजर आता है।

‘कलाकार अंधेरे में अपनी खुशी तलाशता है’

नाना पाटेकर ने इंटरव्यू में कलाकार की दुनिया के एक दूसरे पहलू पर भी बात की थी। उन्होंने मंच पर अभिनय करने के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा था कि कलाकार के सामने अक्सर अंधेरा होता है, जबकि वह रोशनी में खड़ा होकर अपनी प्रस्तुति देता है। उनके अनुसार, शायद कलाकार की यही प्रकृति है कि उसे उस अंधेरे में भी अपनी खुशी तलाशनी पड़ती है।

उन्होंने दर्शकों की तालियों को कलाकार के लिए एक तरह की आदत और लत जैसा बताया था। जब मंच पर तालियां मिलती हैं तो कलाकार को एक अलग तरह की खुशी महसूस होती है। लेकिन इसी के साथ यह सवाल भी जुड़ा रहता है कि जब तालियां बंद हो जाएंगी तो क्या होगा। नाना पाटेकर की यह बात उनके अभिनय के प्रति जुनून और कलाकार की मानसिक दुनिया को समझने का एक अलग नजरिया देती है।

तालियों की आवाज से जुड़ी थी कलाकार की जिंदगी

नाना पाटेकर ने अपने इंटरव्यू में कलाकार की जिंदगी को तालियों से जोड़ते हुए कहा था कि जिस दिन वह आवाज और तालियों की गूंज बंद हो जाती है, उस दिन कलाकार के लिए सब कुछ बदल जाता है। इसके बाद शायद उसे पहले की तरह काम न मिले और लोग उसे याद करना भी बंद कर दें। उनके ये शब्द उस समय भले ही एक कलाकार के अनुभव के तौर पर सामने आए थे, लेकिन उनके निधन के बाद प्रशंसक इन्हें उनकी जिंदगी और करियर से जोड़कर देख रहे हैं।

नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर में कई दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी आवाज, चेहरे के भाव और संवाद बोलने का अंदाज उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाता था। गंभीर भूमिकाओं से लेकर व्यावसायिक फिल्मों तक उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और अपनी अभिनय क्षमता की छाप छोड़ी।

‘गमन’ से शुरू हुआ था शानदार सफर

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’ और ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी अभिनय क्षमता को लगातार सराहना मिली और वह हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल हो गए।

इसके बाद ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं। उनकी फिल्मों में गंभीर सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध, राजनीति और मानवीय भावनाओं तक कई विषय देखने को मिले।

तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित

नाना पाटेकर को उनके शानदार अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। साल 2013 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया। अभिनय के अलावा उन्होंने निर्देशन और लेखन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।

नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके पुराने इंटरव्यू की बातें अब एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में हैं। जिंदगी को लेकर उनका नजरिया, कलाकार के संघर्ष की उनकी समझ और अभिनय के प्रति उनका जुनून उनके व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है। पर्दे पर उन्होंने कई किरदारों को जीवन दिया, लेकिन उनके अपने शब्दों में कलाकार की जिंदगी भी एक ऐसे सफर की तरह थी, जिसमें वह दूसरों के लिए किरदार जीते-जीते कई बार खुद के लिए जीना भूल जाता है। आज जब नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं, उनके ये विचार उनकी यादों और उनकी विरासत का अहम हिस्सा बन गए

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