नाना पाटेकर के निधन के बाद आदिल हुसैन ने उनसे जुड़ी खास याद साझा की। उन्होंने बताया कि नाना को खाना बनाने और सह-कलाकारों व क्रू को अपने हाथों से खाना खिलाने का बेहद शौक था।
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। 75 साल की उम्र में उनके निधन के बाद उनके चाहने वाले और साथी कलाकार उन्हें अलग-अलग यादों के जरिए श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा में उनके दमदार अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी के लिए जाना जाता था, लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू भी था, जिसके बारे में उनके करीबी और साथी कलाकार अक्सर बात करते रहे हैं। नाना पाटेकर को खाना बनाने और लोगों को अपने हाथों से खाना खिलाने का बेहद शौक था। शूटिंग के दौरान वह सिर्फ अपने अभिनय तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि कलाकारों और क्रू के साथ घुल-मिल जाते थे और कई बार अपने हाथों से उनके लिए खाना भी तैयार करते थे।
खाना बनाने का था गहरा शौक
नाना पाटेकर के साथी कलाकारों के मुताबिक, उन्हें खाना पकाने और लोगों को खिलाने में खास खुशी मिलती थी। वह शूटिंग सेट पर मौजूद कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों के लिए खाना बनाना पसंद करते थे। उन्होंने एक बार मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह एक अभिनेता से बेहतर कुक हैं। उनके इस बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाना बनाना उनके लिए महज शौक नहीं, बल्कि खुशी देने वाली गतिविधि थी।
नाना पाटेकर ने कभी यह भी बताया था कि वह एक समय में करीब 200 लोगों के फिल्म क्रू के लिए खाना बना सकते हैं। खाना तैयार करने की प्रक्रिया में वह सिर्फ खुद ही काम नहीं करते थे, बल्कि कलाकारों और क्रू के लोगों को भी इसमें शामिल कर लेते थे। सब्जियां काटना, छीलना और दूसरे छोटे-बड़े काम मिलकर किए जाते थे। इस तरह खाना बनाने का पूरा सिलसिला सेट पर एक अलग तरह के पारिवारिक माहौल में बदल जाता था।
आदिल हुसैन ने सुनाई नाना से जुड़ी खास याद
नाना पाटेकर के निधन के बाद अभिनेता आदिल हुसैन ने उनसे जुड़ी यादों को साझा किया। आदिल हुसैन ने बताया कि नाना ने उनके लिए स्वादिष्ट नॉन-वेज खाना बनाया था। उनके लिए यह सिर्फ एक भोजन नहीं था, बल्कि नाना पाटेकर के व्यक्तित्व की गर्मजोशी और अपनापन दिखाने वाली याद थी।
आदिल हुसैन और नाना पाटेकर ने अनंत महादेवन की फिल्म ‘द कन्फेशन ऑफ मैरी’ में साथ काम किया है। यह फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर सितंबर में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। फिल्म में नाना पाटेकर एक रोमन कैथोलिक पादरी की भूमिका में नजर आएंगे। दोनों कलाकारों ने इस फिल्म में साथ स्क्रीन साझा की और इसी दौरान आदिल को नाना के साथ समय बिताने और उनके इस खास हुनर को करीब से देखने का मौका मिला।
सेट पर कलाकारों को अपने साथ जोड़ लेते थे नाना
नाना पाटेकर के व्यक्तित्व की खासियत यह थी कि वह अपने आसपास के लोगों से आसानी से जुड़ जाते थे। खाना बनाने का उनका शौक इसी स्वभाव का हिस्सा था। जब वह सेट पर खाना बनाते थे तो दूसरे कलाकार और क्रू सदस्य भी उनके साथ शामिल हो जाते थे। सब्जियां काटने और छीलने जैसे कामों में लोगों की भागीदारी उन्हें पसंद थी। इससे सेट का माहौल भी हल्का और खुशनुमा हो जाता था।
फिल्म की शूटिंग के दौरान लंबे समय तक कलाकार और तकनीकी टीम एक साथ रहती है। ऐसे में खाना साझा करना और साथ बैठकर खाना रिश्तों को मजबूत करने का काम करता है। नाना पाटेकर इस बात को बखूबी समझते थे। यही वजह थी कि उनके साथी कलाकार उन्हें सिर्फ एक महान अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में भी याद करते हैं, जो लोगों को अपनेपन का एहसास कराता था।
अभिनय के साथ जमीन से जुड़े इंसान थे नाना
नाना पाटेकर का फिल्मी करियर कई दशकों तक चला। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं और अपनी खास अभिनय शैली से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई। गंभीर किरदारों से लेकर व्यावसायिक फिल्मों तक उन्होंने हर तरह के रोल में अपनी छाप छोड़ी। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और चेहरे के भाव उनकी सबसे बड़ी पहचान बने।
लेकिन कैमरे के सामने नजर आने वाले इस अभिनेता के पीछे एक ऐसा इंसान भी था, जिसे साधारण चीजों में खुशी मिलती थी। खाना बनाना और दूसरों को खिलाना उनके लिए इसी खुशी का हिस्सा था। वह अपने सहकर्मियों के साथ भोजन साझा करके एक अलग तरह का जुड़ाव महसूस करते थे।
‘द कन्फेशन ऑफ मैरी’ में फिर दिखेगा नाना का अभिनय
नाना पाटेकर की मौत के बाद ‘द कन्फेशन ऑफ मैरी’ उनके प्रशंसकों के लिए विशेष महत्व रखती है। अनंत महादेवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नाना पाटेकर रोमन कैथोलिक पादरी की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हो चुका है। अब नाना के निधन के बाद दर्शकों की इस फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से जो विरासत छोड़ी है, उसे उनके सहकर्मियों की निजी यादें और भी खास बनाती हैं। आदिल हुसैन द्वारा उनके हाथ के बने खाने को याद करना बताता है कि नाना के साथ काम करने वाले लोगों के लिए वह सिर्फ एक सह-अभिनेता नहीं थे। वह ऐसे कलाकार थे, जो अपने हुनर के साथ-साथ अपने व्यवहार, जुनून और अपनापन से भी लोगों के दिलों में जगह बना लेते थे। अभिनय की दुनिया में उनकी कमी शायद कभी पूरी न हो, लेकिन उनके साथ काम कर चुके कलाकारों की ऐसी यादें उन्हें हमेशा लोगों के बीच जीवित रखेंगी।