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सत्य निकेतन हादसे पर सौरभ भारद्वाज ने मोबाइल जैमर, NDRF के पहुंचने में देरी और सरकारी एंबुलेंस की लेटलतीफी को लेकर सवाल उठाए और जवाबदेही मांगी।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रावास की इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद प्रशासन की कार्रवाई और आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब छात्रों और उनके परिवारों को मिलना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मोबाइल नेटवर्क जाम किए जाने के कथित फैसले, NDRF के घटनास्थल तक पहुंचने में हुई देरी और सरकारी एंबुलेंस की कथित लेटलतीफी पर सवाल उठाए।
मोबाइल जैमर को लेकर सौरभ भारद्वाज का सवाल
सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि यदि मलबे में कोई छात्र फंसा हुआ था और मोबाइल सिग्नल बाधित थे, तो वह बाहर मदद के लिए फोन कैसे कर सकता था। उन्होंने पूछा कि सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसे की जगह पर मोबाइल जैमर लगाने का आदेश किसने दिया था। भारद्वाज का आरोप है कि ऐसी स्थिति में मोबाइल कनेक्टिविटी बाधित होने से मलबे में फंसे लोगों के लिए अपने परिजनों या राहत टीमों से संपर्क करना मुश्किल हो सकता था। उन्होंने यह भी सवाल किया कि हादसे के बाद प्रशासन की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए थी।
हालांकि, इस आरोप पर दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट रूप से अलग दावा किया है। दिल्ली पुलिस ने मोबाइल जैमर लगाए जाने की खबरों को गलत बताते हुए कहा कि बचाव अभियान के दौरान मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस, NDRF और दमकल विभाग के कर्मचारी मोबाइल फोन के जरिए समन्वय कर रहे थे और घटनास्थल से मीडिया तथा आम लोग भी लाइव प्रसारण कर रहे थे।
NDRF के पहुंचने में देरी पर उठे सवाल
सत्य निकेतन हादसे पर गंभीर सवाल—
मलबे में फंसा कोई छात्र मदद कैसे मांगता, जब मोबाइल सिग्नल जाम थे? घटनास्थल पर मोबाइल जैमर लगाने का आदेश किसने दिया?
🔹 दिल्ली के बीचों-बीच NDRF को पहुंचने में 2-3 घंटे क्यों लगे?
🔹 सरकारी एंबुलेंस 2 घंटे देरी से क्यों पहुंचीं?
छात्रों के इन… pic.twitter.com/cHlSFdmu65
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) September 8, 2026
सौरभ भारद्वाज ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि दिल्ली के बीचोंबीच स्थित सत्य निकेतन तक NDRF को पहुंचने में कथित तौर पर 2 से 3 घंटे क्यों लगे। उनका कहना है कि इस तरह के हादसे में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकालना जरूरी होता है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और छात्रों द्वारा शुरुआती बचाव प्रयास किए जाने की भी खबरें सामने आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आसपास मौजूद लोगों ने मलबा हटाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। एक छात्र को भारी कंक्रीट के नीचे से निकालने के लिए स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों ने मिलकर प्रयास किया।
सरकारी एंबुलेंस की देरी पर भी सवाल
AAP नेता ने सरकारी एंबुलेंस के घटनास्थल पर पहुंचने में कथित देरी को लेकर भी सवाल उठाया। भारद्वाज के अनुसार, सरकारी एंबुलेंस करीब दो घंटे बाद पहुंची, जबकि शुरुआती दौर में एक निजी Blinkit एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची थी। इस दावे के बीच घटना के बाद सार्वजनिक आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।
हादसे में सात लोगों की मौत
सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत के गिरने से सात लोगों की मौत हुई है। हादसे में कई लोग घायल भी हुए और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद इमारत की सुरक्षा, निर्माण कार्य और छात्र आवासों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रारंभिक जांच में इमारत में अतिरिक्त निर्माण और हाल में किए गए काम जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
जांच और जवाबदेही की मांग तेज
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस जांच में निर्माण और इमारत की स्थिति से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। ऐसे में सौरभ भारद्वाज द्वारा उठाए गए सवाल अब राहत एवं बचाव व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही तक भी पहुंच गए हैं।
छात्रों और परिवारों को जवाब का इंतजार
सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाते हुए कहा कि इन सभी मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। मोबाइल नेटवर्क को लेकर लगाए गए आरोपों पर दिल्ली पुलिस का खंडन सामने आ चुका है, इसलिए इस पूरे मामले में तथ्य क्या हैं, यह जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा। फिलहाल सत्य निकेतन हादसे ने छात्र आवासों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रशासनिक समन्वय को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवार और प्रभावित छात्र समुदाय यह जानना चाहते हैं कि दुर्घटना के समय राहत एवं बचाव व्यवस्था कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से काम कर रही थी और यदि कहीं चूक हुई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।