सागर रबारी: आप’ को गुजरात में बड़ा झटका: किसान नेता सागर रबारी का इस्तीफा, फेसबुक पोस्ट से दी जानकारी।

सागर रबारी: आप' को गुजरात में बड़ा झटका: किसान नेता सागर रबारी का इस्तीफा, फेसबुक पोस्ट से दी जानकारी।

सागर रबारी: गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026 से पहले ‘आप’ के प्रदेश महासचिव सागर रबारी ने इस्तीफा दे दिया है। जानें क्यों दिग्गज किसान नेता ने छोड़ा पार्टी का साथ और भाजपा पर क्या लगाए आरोप।

सागर रबारी का ‘आप’ से इस्तीफा और फेसबुक संदेश

गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों की आहट के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश महासचिव और कद्दावर किसान नेता सागर रबारी ने रविवार को अपने सभी पदों और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। रबारी ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर इस फैसले की घोषणा करते हुए लिखा कि वह आज ‘आप’ के साथ अपनी यात्रा समाप्त कर रहे हैं और खुद को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने इस्तीफे के लिए किसी स्पष्ट विवाद का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने अपने साथियों को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि व्यक्तिगत मित्रता और संबंध भविष्य में भी बरकरार रहेंगे।

किसानों के बीच प्रभाव और ग्रामीण राजनीति पर असर

सागर रबारी का इस्तीफा गुजरात के ग्रामीण और किसान वोट बैंक के लिहाज से आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। गुजरात के खेड़ूत समाज और किसान आंदोलनों में एक मुखर स्तंभ के रूप में पहचान रखने वाले रबारी की जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ है। बेचारजी (महसाणा) से चुनाव लड़ चुके रबारी ने कपास और अन्य कृषि संकटों पर लगातार सरकार को घेरा था। उनके जाने से सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के उन ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है, जहाँ वे किसानों की समस्याओं को लेकर सक्रिय थे।

भाजपा पर हालिया हमले और इस्तीफे की टाइमिंग

सागर रबारी के इस कदम ने राजनैतिक गलियारों में सबको चौंका दिया है, क्योंकि उन्होंने कुछ ही दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ भाजपा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाताओं को डराने-धमकाने का प्रयास कर रही है और ‘आप’ कार्यकर्ताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पाबंदी लगा रही है। इन कड़े तेवरों और पार्टी के बढ़ते आधार का दावा करने के बावजूद अचानक इस्तीफे के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे किसी नई राजनैतिक पारी की शुरुआत करते हैं या पुनः एक स्वतंत्र किसान एक्टिविस्ट के रूप में सक्रिय होंगे।

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