सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने बताया कि उन्होंने अब तक शादी क्यों नहीं की। 50 वर्षीय सबा ने कहा कि उन्हें अब तक ऐसा साथी नहीं मिला, जो उनके साथ वास्तव में compatible हो।
पटौदी परिवार हमेशा से अपनी शाही विरासत, फिल्मी दुनिया और क्रिकेट से जुड़े इतिहास को लेकर चर्चा में रहा है। जहां शर्मिला टैगोर के बेटे सैफ अली खान और बेटी सोहा अली खान ने अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं उनकी बेटी सबा पटौदी ने ग्लैमर इंडस्ट्री से अलग रास्ता चुना। सबा भले ही फिल्मों से दूर रहती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर अपने परिवार के साथ जुड़ी तस्वीरों और भावुक पोस्ट के कारण वह अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। अब सबा ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्होंने बताया कि आखिर उन्होंने शादी क्यों नहीं की।
18-19 साल की उम्र से शादी के लिए आने लगे रिश्ते
हाल ही में नेहा धूपिया और अंगद बेदी के साथ बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने अपनी शादी और रिश्तों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में कभी कोई पहला बॉयफ्रेंड नहीं रहा। इसके बजाय, महज 18-19 साल की उम्र से ही उनके लिए शादी के रिश्ते आने शुरू हो गए थे।
सबा ने बताया कि उस उम्र में उन्हें कई लोगों से शादी के उद्देश्य से मिलवाया गया। एक समय तो वह कोलकाता में एक ऐसे व्यक्ति से शादी करने के करीब पहुंच गई थीं, जिससे उनका परिचय कराया गया था। हालांकि, वह रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका। सबा के मुताबिक, उस समय वह शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं।
‘मुझे कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो मेरे लिए सही हो’
सबा पटौदी ने बताया कि बाद में वह शादी के लिए तैयार थीं, लेकिन उन्हें ऐसा साथी नहीं मिला जिसके साथ उन्हें वास्तविक अनुकूलता महसूस हो। उनके अनुसार, जिंदगी में शादी केवल सामाजिक व्यवस्था या परिवार की इच्छा के आधार पर नहीं की जानी चाहिए, बल्कि जीवनसाथी के साथ विचारों और व्यक्तित्व की समानता भी महत्वपूर्ण है।
सबा ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो वास्तव में उनके लिए उपयुक्त हो। उनके इस बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि उन्होंने केवल उम्र या सामाजिक दबाव की वजह से शादी करने का फैसला नहीं किया।
पिता मंसूर अली खान पटौदी का रहा गहरा प्रभाव
अपनी शादी को लेकर बात करते हुए सबा ने अपने पिता और भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी मंसूर अली खान पटौदी का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने पिता को बेहद करिश्माई, विनम्र और जिम्मेदार व्यक्ति बताया।
सबा ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें आत्मनिर्भर बनना सिखाया। उनके लिए पिता जैसा व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से एक मजबूत मानक बन गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने जीवनसाथी में बिल्कुल अपने पिता जैसा व्यक्ति तलाश नहीं रही थीं, लेकिन उनके पिता का व्यक्तित्व और उनके द्वारा दी गई सीख उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है।
‘मुझे लड़का नहीं, एक परिपक्व पुरुष चाहिए’
सबा ने अभिनेत्री तापसी पन्नू की एक बात का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी यह विचार पसंद आया था कि ‘मुझे लड़का नहीं, एक पुरुष चाहिए।’ सबा के लिए इसका अर्थ केवल उम्र से नहीं, बल्कि सोच, जिम्मेदारी और व्यक्तित्व की परिपक्वता से है।
उन्होंने बताया कि वह ऐसे साथी की तलाश में थीं जो समझदार, जिम्मेदार और उनके व्यक्तित्व के साथ तालमेल रखने वाला हो। हालांकि, उन्हें अब तक ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, जिसके साथ वह शादी के रिश्ते में खुद को सहज महसूस कर सकें।
कौन हैं सबा पटौदी?
सबा पटौदी का जन्म 1 मई 1976 को हुआ था। वह शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की सबसे बड़ी बेटी हैं। जहां उनके भाई सैफ अली खान और बहन सोहा अली खान ने फिल्मों में करियर बनाया, वहीं सबा ने अभिनय से दूरी बनाए रखी।
सबा पेशे से ज्वेलरी डिजाइनर हैं। इसके अलावा वह टैरो रीडर और स्पिरिचुअल हीलर के तौर पर भी अपनी पहचान रखती हैं। वह भोपाल स्थित रॉयल एंडोमेंट ट्रस्ट की चीफ कस्टोडियन भी हैं। अपनी शाही पारिवारिक विरासत से जुड़े कार्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।
सोशल मीडिया पर परिवार के लिए लिखती हैं भावुक पोस्ट
सबा पटौदी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह अक्सर अपनी मां शर्मिला टैगोर, भाई सैफ अली खान, बहन सोहा अली खान और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ तस्वीरें साझा करती हैं। उनके पोस्ट में परिवार के प्रति उनका लगाव और भावनात्मक जुड़ाव साफ दिखाई देता है।
इंस्टाग्राम पर उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं और वह अपनी निजी जिंदगी के साथ-साथ परिवार से जुड़ी यादों को भी साझा करती रहती हैं। यही वजह है कि फिल्मों से दूर रहने के बावजूद सबा पटौदी की सोशल मीडिया पर अच्छी खासी लोकप्रियता है।
शादी को लेकर सबा की सोच है बिल्कुल अलग
सबा पटौदी की कहानी यह दिखाती है कि शादी हर व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने कम उम्र में मिले रिश्तों के बावजूद जल्दबाजी में शादी नहीं की और बाद में भी केवल सामाजिक अपेक्षाओं के कारण किसी रिश्ते को स्वीकार नहीं किया।
उनका कहना है कि जीवनसाथी के साथ वास्तविक अनुकूलता और समझ होना जरूरी है। आज 50 साल की उम्र में भी सबा अपने फैसले को लेकर स्पष्ट नजर आती हैं। उनके बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि शादी की सही उम्र तय करने से ज्यादा जरूरी क्या यह नहीं है कि व्यक्ति अपने जीवन के लिए सही साथी और सही समय का चुनाव खुद करे।