Russia Plague Case: इरकुत्स्क में प्लेग का संदिग्ध मामला, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 189 लोग निगरानी में

Russia Plague Case: इरकुत्स्क में प्लेग का संदिग्ध मामला, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 189 लोग निगरानी में

 

रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र में न्यूमोनिक प्लेग के संदिग्ध मामले के बाद लैब टेक्नीशियन की मौत हो गई। करीब 189 लोगों को निगरानी में रखा गया है। जानें क्या है प्लेग।

प्लेग का नाम सुनते ही आमतौर पर 14वीं सदी में फैली ब्लैक डेथ की याद आती है, जिसने यूरोप की बड़ी आबादी को प्रभावित किया था। आधुनिक चिकित्सा और एंटीबायोटिक्स के दौर में यह बीमारी अधिकांश लोगों को इतिहास का हिस्सा लगती है। लेकिन रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्लेग के एक संदिग्ध मामले ने इस बीमारी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, एक लैब टेक्नीशियन की गंभीर बीमारी के बाद मौत हुई है और उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को निगरानी में रखा गया है। हालांकि, संक्रमण की वास्तविक वजह को लेकर अभी तक अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं और रूसी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से किसी एक कारण की पुष्टि नहीं की है।

क्या है इरकुत्स्क का पूरा मामला?

रिपोर्टों के मुताबिक, 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि 25 सितंबर को काम के दौरान न्यूमोनिक प्लेग बैक्टीरिया वाला एक टेस्ट ट्यूब दुर्घटनावश टूट गया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें इरकुत्स्क के पास शेलेखोव में गंभीर निमोनिया की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में उनकी मौत हो गई।

हालांकि, संक्रमण कैसे हुआ, इसे लेकर सभी रिपोर्ट एक जैसी नहीं हैं। एक संभावना यह भी बताई गई कि वह बुर्यातिया की यात्रा से लौटी थीं, जहां मंगोलिया की सीमा के पास प्लेग का प्रकोप रिपोर्ट किया गया था। दूसरी ओर, टूटी हुई टेस्ट ट्यूब से संक्रमण होने की संभावना भी चर्चा में है। फिलहाल रूसी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से संक्रमण के स्रोत की अंतिम पुष्टि नहीं की है।

करीब 200 लोग निगरानी में

लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू कर दी है। रिपोर्टों में करीब 189 लोगों को आइसोलेशन में रखे जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें 114 लोग एक अस्पताल, 63 दूसरे अस्पताल और 12 लोग संबंधित संस्थान में बताए गए हैं।

इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोबजेव के अनुसार, संपर्क में आए लोगों में फिलहाल बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं और उनकी जांच के परिणाम नकारात्मक बताए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, स्थिति को देखते हुए इरकुत्स्क में कुछ सार्वजनिक कार्यक्रम भी रद्द किए गए। संभावित स्वास्थ्य सुरक्षा उल्लंघन को लेकर पुलिस द्वारा आपराधिक जांच शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है।

प्लेग आखिर क्या होता है?

प्लेग एक संक्रामक बीमारी है, जो Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से छोटे स्तनधारी जीवों, विशेषकर कृंतकों में पाया जाता है और संक्रमित पिस्सुओं के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है। संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से भी संक्रमण हो सकता है।

प्लेग के तीन प्रमुख रूप माने जाते हैं—ब्यूबोनिक, सेप्टीसीमिक और न्यूमोनिक। ब्यूबोनिक प्लेग में शरीर के लिम्फ नोड्स में दर्दनाक सूजन हो सकती है। सेप्टीसीमिक प्लेग में संक्रमण रक्त तक पहुंच जाता है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है।

न्यूमोनिक प्लेग क्यों माना जाता है गंभीर?

इरकुत्स्क के मामले में न्यूमोनिक प्लेग की आशंका ने विशेष चिंता पैदा की है। यह प्लेग का ऐसा रूप है जो सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह प्लेग का सबसे गंभीर और तेजी से बढ़ने वाला रूप हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाली श्वसन बूंदों के संपर्क में आने से यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है।

यही कारण है कि संभावित न्यूमोनिक प्लेग के मामले में संपर्कों की पहचान और उन्हें निगरानी में रखना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। बीमारी का समय पर पता लगना भी अहम है। इलाज के बिना न्यूमोनिक प्लेग बेहद घातक हो सकता है, जबकि शुरुआती चरण में उपयुक्त एंटीबायोटिक उपचार प्रभावी हो सकता है।

क्या ब्लैक डेथ वाला प्लेग आज भी मौजूद है?

प्लेग भले ही इतिहास की सबसे भयावह महामारियों में से एक से जुड़ा हो, लेकिन इसके जिम्मेदार बैक्टीरिया का अस्तित्व खत्म नहीं हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया के कुछ हिस्सों में आज भी प्लेग के मामले सामने आते हैं। अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में इसके मामले दर्ज किए जाते रहे हैं।

मेडागास्कर और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे देशों में भी प्लेग के मामले सामने आते रहे हैं। अमेरिका में भी हर साल कुछ मामले दर्ज होते हैं, जिनमें से अधिकतर ग्रामीण पश्चिमी क्षेत्रों से जुड़े होते हैं।

आज स्थिति 14वीं सदी से कितनी अलग है?

14वीं सदी में ब्लैक डेथ के दौरान आधुनिक चिकित्सा, एंटीबायोटिक्स और संक्रमण की निगरानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। आज स्थिति काफी अलग है। प्लेग के इलाज के लिए प्रभावी एंटीबायोटिक मौजूद हैं और स्वास्थ्य एजेंसियां संदिग्ध मामलों की पहचान, संपर्कों की निगरानी और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए तेजी से कदम उठा सकती हैं।

इसलिए रूस में सामने आया संदिग्ध मामला चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसे सीधे मध्यकालीन ब्लैक डेथ जैसी स्थिति से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्कों की निगरानी की जा रही है और बीमारी के स्रोत की जांच जारी है। अंतिम स्थिति संक्रमण की पुष्टि और आगे की स्वास्थ्य जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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