टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले मुकाबले से पहले ऋचा घोष की फॉर्म में वापसी ने भारतीय टीम को मजबूती दी है। कोच अमोल मजूमदार ने उनकी तारीफ की।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने इस बात को स्वीकार किया है कि विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष पिछले दो महीनों से खराब फॉर्म से जूझ रही थीं। हालांकि, टी20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले इंग्लैंड के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में खेली गई उनकी शानदार अर्धशतकीय पारी ने टीम मैनेजमेंट और खुद खिलाड़ी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा दिया है। मजूमदार का मानना है कि ऋचा एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं और बड़े मंच पर वापसी करने के लिए उन्हें बस कुछ अच्छे शॉट्स की जरूरत थी, जो उन्हें अभ्यास मैच में मिल गए।
इंग्लैंड के खिलाफ अर्धशतक से मिली नई ऊर्जा
इंग्लैंड के खिलाफ वॉर्म-अप मुकाबले में ऋचा घोष ने मात्र 36 गेंदों में 68 रनों की तूफानी पारी खेली। यह प्रदर्शन टीम के लिए बेहद राहत की बात है क्योंकि अप्रैल के मध्य के बाद से ऋचा के बल्ले से कोई भी पचास से अधिक का स्कोर नहीं निकला था। ऋचा की इस खराब फॉर्म का सीधा असर दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के खिलाफ हुई पिछली सीरीज में भारत की हार पर भी पड़ा। मजूमदार ने प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैं इस बात से इनकार नहीं करूँगा कि वह एक खराब दौर से गुजर रही थीं। लेकिन वह एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं। ड्रेसिंग रूम में हमारी हमेशा यही चर्चा होती थी कि ऋचा जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को लय में वापस आने के लिए बस कुछ गेंदों को बाउंड्री के पार भेजने की जरूरत है।”
भारत के लिए ऋचा की भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण?
भारतीय टीम की बल्लेबाजी लाइन-अप में ऋचा घोष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब टीम बड़े लक्ष्यों का पीछा कर रही हो और ऊपरी क्रम के बल्लेबाज शुरुआत में संघर्ष कर रहे हों। मजूमदार ने जोर देकर कहा कि ऋचा नंबर पांच या छह पर बल्लेबाजी करते हुए स्थिति के अनुसार खेल को बदलने में सक्षम हैं। वह एक परिपक्व क्रिकेटर हैं और भारतीय टीम के लिए मैच फिनिशर की भूमिका बखूबी निभाती हैं। ऋचा का फॉर्म में वापस लौटना टीम इंडिया के लिए वर्ल्ड कप में एक बड़े प्लस पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी चुनौती
टी20 वर्ल्ड कप में भारत का पहला मुकाबला अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ है। ऋचा घोष का पाकिस्तान के खिलाफ रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है। अब तक खेले गए तीन मैचों में उन्होंने 28.5 की औसत और 167.64 के स्ट्राइक रेट से 57 रन बनाए हैं। पाकिस्तान की गेंदबाजी आक्रमण में नशरा संधू जैसी किफायती स्पिनर शामिल हैं, जिनके खिलाफ ऋचा की आक्रामक बल्लेबाजी भारत के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। मजूमदार ने उम्मीद जताई कि वॉर्म-अप मैच में बिताया गया समय ऋचा को वर्ल्ड कप के दबाव वाले मैचों के लिए पूरी तरह तैयार कर देगा।
मजबूत बल्लेबाजी क्रम की तैयारी
पाकिस्तान के खिलाफ आगामी मैच में भारतीय टीम केवल ऋचा घोष पर ही निर्भर नहीं रहेगी। कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ-साथ जेमिमा रोड्रिग्स और भारती फुलमाली जैसी बल्लेबाजों पर भी जिम्मेदारी होगी कि वे स्कोरिंग रेट को बनाए रखें। भारतीय टीम की रणनीति स्पष्ट है: शीर्ष क्रम को एक स्थिर शुरुआत देनी होगी, जबकि मध्य और निचले क्रम की बल्लेबाज ऋचा और भारती जैसे खिलाड़ियों को अंतिम ओवरों में तेजी से रन बटोरने होंगे।
टी20 वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में शुरुआती मैच की जीत का महत्व बहुत अधिक होता है। भारत और पाकिस्तान का मैच हमेशा से ही रोमांचक और दबाव वाला रहा है। ऐसे में ऋचा घोष जैसी आक्रामक खिलाड़ी का फॉर्म में होना टीम इंडिया की जीत की संभावनाओं को काफी मजबूत बनाता है। कोच अमोल मजूमदार का मानना है कि ऋचा अब पूरी तरह से लय में हैं और वह वर्ल्ड कप के दौरान अपनी क्लास दिखाने के लिए तैयार हैं। भारतीय प्रशंसक भी यही उम्मीद कर रहे हैं कि ऋचा न केवल पाकिस्तान के खिलाफ बल्कि पूरे टूर्नामेंट में अपने बल्ले से कमाल दिखाएंगी और भारत को खिताबी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगी।