Reliance Jio IPO: ‘मदर ऑफ आईपीओ’ बनने की ओर Jio Platforms, सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार

Reliance Jio IPO: ‘मदर ऑफ आईपीओ’ बनने की ओर Jio Platforms, सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार

Reliance Jio IPO: मुकेश अंबानी की Jio Platforms धीरे-धीरे स्टॉक मार्केट डेब्यू के करीब, सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार। जानें IPO साइज, SEBI नियम और मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग।

Reliance Jio IPO: मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली Reliance Industries (RIL) की टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms धीरे-धीरे अपने स्टॉक मार्केट डेब्यू के करीब पहुंच रही है। इसे मीडिया में ‘मदर ऑफ आईपीओ’ के रूप में भी पेश किया जा रहा है। फिलहाल, कंपनी IPO लॉन्च के लिए सरकार की तरफ से फाइनल नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है।

कंपनी अभी अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को आधिकारिक रूप से दाखिल नहीं कर रही है। जैसे ही अनुमति मिल जाएगी, यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस IPO का आकार 4–4.5 बिलियन डॉलर (लगभग 33,000–37,000 करोड़ रुपये) के बीच होने का अनुमान है।

थोड़ा और इंतजार जरूरी

RIL की दिसंबर तिमाही की कमाई के दौरान, कंपनी के SVP (स्ट्रैटेजी और प्लानिंग) अंशुमन ठाकुर ने कहा कि Jio Platforms अंदरूनी तौर पर IPO की तैयारी कर रही है, लेकिन सरकार की तरफ से फाइनल नोटिफिकेशन का इंतजार है। उन्होंने बताया कि कंपनी अभी SEBI की सिफारिशों के अनुसार नियमों को फाइनल करने पर काम कर रही है।

अंशुमन ठाकुर ने कहा, “जैसे ही सरकार का नोटिफिकेशन मिलेगा, अगले कुछ महीनों में IPO लॉन्च कर दिया जाएगा। हम फिलहाल नियमों के अनुमान पर काम कर रहे हैं।”

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SEBI का नया नियम और IPO की रूपरेखा

सितंबर 2025 में मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 50000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए IPO में मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) की शर्त घटाकर 2.5% करने की सिफारिश की थी। इसका मतलब है कि जिन कंपनियों का लिस्टिंग के बाद मार्केट कैप 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच होगा, उन्हें MPS नियम पूरा करने के लिए 5 साल का समय मिलेगा।

वहीं, जिन कंपनियों का लिस्टिंग के बाद मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा, उन्हें 10 साल का समय मिलेगा।

मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग क्या है?

MPS का अर्थ है कि किसी भी लिस्टेड कंपनी के कम से कम 25% शेयर आम निवेशकों के पास होने चाहिए। इसका उद्देश्य प्रमोटरों के प्रभुत्व को कम करना और बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ाना है।

इस नए नियम के अनुसार, Jio Platforms का IPO न केवल भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक इश्यू होगा, बल्कि यह निवेशकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

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