FWICE और अभिनेता रणवीर सिंह के बीच ‘डॉन 3’ को लेकर चल रही बहस गहरी हुई है। क्या रणवीर की आने वाली फिल्मों प्रलय और चंद्रगुप्त मौर्य इस ‘असहयोग निर्देश’ से प्रभावित होंगे?
हाल ही में, बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह एक गंभीर विवाद में घिर गए हैं, जो फिल्म उद्योग को हिला कर रख दिया है। यह मामला उनके कथित रूप से फिल्म ‘डॉन 3’ से बाहर होने से जुड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने उनके खिलाफ ‘असहयोग निर्देश’ जारी किया है। अब यह बहस इतनी बढ़ गई है कि रणवीर सिंह की बड़ी फिल्मों, जैसे आदित्य धर की ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ और ज़ोंबी थ्रिलर की ‘प्रलय’, के भविष्य पर भी संदेह है।
विवाद का मूल: “डॉन 3” और भारी क्षति के आरोप
डॉन 3 के निर्माण के दौरान इस पूरे बहस की शुरुआत हुई। निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने बताया कि रणवीर सिंह के अचानक काम छोड़ने से वे काफी पैसे खो चुके हैं। इस शिकायत पर FWICE ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग निर्देश जारी किया। फेडरेशन का मानना है कि इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार उत्पादन कंपनी को रचनात्मक और आर्थिक रूप से पीछे धकेल देता है।
फिल्म उद्योग में परिवर्तन और तकनीकी कर्मचारियों पर प्रभाव
FWICE के इस कदम से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री चिंतित है। फेडरेशन में फिल्म शूट से जुड़े 34 वेंडर एसोसिएशन और विभिन्न कर्मचारी यूनियनें हैं, जिनमें तकनीशियन, स्पॉट स्टाफ, मेकअप आर्टिस्ट, लाइटिंग टीमें और कॉस्ट्यूम वर्कर्स शामिल हैं। ऐसे में, यदि यह निर्देश पूरी तरह प्रभावी होता है, तो किसी भी फिल्म की शूटिंग करने के लिए एक दल को पाना कठिन होगा।
रणवीर सिंह की आने वाली फिल्म ‘प्रलय’, जिसकी शूटिंग अगस्त में शुरू होनी है, अब बहुत खराब है। इस फिल्म में अलग-अलग विभागों से लगभग पांच सौ क्रू मेंबर्स होने की उम्मीद है। यदि ये सभी संघों में शामिल हैं, तो शूटिंग को समय पर शुरू करना लगभग असंभव होगा।
क्या दिहाड़ी कर्मचारी इस निर्णय से प्रभावित होंगे?
कई फिल्म निर्माता इस पूरे मामले में एक अतिरिक्त मुद्दा उठाते हैं। मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन से जुड़े एक सूत्र ने सवाल उठाया कि क्या रणवीर सिंह से ज्यादा दिहाड़ी मजदूरों को इस कदम से नुकसान नहीं होगा जो पहले से ही कमी से जूझ रहे हैं? वर्तमान में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लगभग 70 प्रतिशत दिहाड़ी कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में FWICE का यह निर्देश उनकी नौकरी के अवसरों को सीधे तौर पर रोक सकता है।
रणवीर सिंह के पास क्या विकल्प हैं?
आलोचकों और विश्लेषकों का मानना है कि रणवीर सिंह के पास ‘प्रलय’ जैसी फिल्मों के अलावा अन्य विकल्प भी हैं। स्थिति गंभीर होने पर अभिनेता पूरी कास्ट और क्रू के साथ भारत में कहीं भी शूटिंग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, FWICE के सदस्य नहीं होने वाले कर्मचारियों को कानूनी रूप से काम करने से नहीं रोका जा सकता। मुंबई से बाहर की उत्पादन इकाइयां स्थानीय संगठनों से भी कर्मचारियों को रख सकती हैं।
FWICE पक्ष: “हमारा प्रभाव कम नहीं”
दूसरी ओर, FWICE के प्रमुख सलाहकार अशोक पंडित अपने विचारों पर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्हें लगता है कि फेडरेशन बहुत प्रभावी है। उनका कहना था, “हमारे पास 34 वेंडर एसोसिएशन हैं।” वेंडर, वर्कर और तकनीशियन नहीं होने पर वे शूटिंग किसके साथ करेंगे? फेडरेशन को लोग कमजोर मानते हैं।उन्होंने आगे कहा कि इस स्थिति का समाधान केवल तब हो सकता है जब सभी पक्ष एक साथ बैठकर सौहार्दपूर्ण बातचीत करें।
मामला CCI की दहलीज तक
अब इस विवाद को हल करने के लिए कानूनी उपायों की तलाश भी की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, रणवीर सिंह की आने वाली परियोजनाओं से जुड़े निर्माता ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ (CCI) से संपर्क करने पर विचार कर रहे हैं। 2017 में, CCI ने फिल्म निर्माता विपुल ए. शाह के एक मामले में स्पष्ट किया कि ‘असहयोग निर्देशों’ को लागू करना और गैर-सदस्यों को काम पर रखने पर पाबंदी लगाना ‘प्रतिस्पर्धा अधिनियम’ के तहत अनुचित व्यवहार माना जा सकता है।
कुल मिलाकर, यह बहस अब सिर्फ रणवीर सिंह बनाम प्रोडक्शन हाउस नहीं है; यह अब फिल्म इंडस्ट्री की व्यवस्था, मजदूर यूनियनों की शक्ति और कानूनों के बीच एक बड़ी बहस बन गया है। यह देखना होगा कि क्या यह बाधा बातचीत से हल होती है या मामला अदालत में जाता है।