कियारा आडवाणी का ‘टॉक्सिक’ के सेट पर अनोखा अनुभव: डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने कियारा को ‘हाय-हेलो’ कहने से क्यों किया मना?

कियारा आडवाणी का 'टॉक्सिक' के सेट पर अनोखा अनुभव: डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने कियारा को 'हाय-हेलो' कहने से क्यों किया मना?

कियारा आडवाणी ने बताया कि फिल्म ‘टॉक्सिक’ की शूटिंग के दौरान निर्देशक गीतू मोहनदास ने उन्हें सेट पर किसी से भी बात करने से मना कर दिया था। जानें क्यों।

बॉलीवुड की प्रतिभाशाली अभिनेत्री कियारा आडवाणी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ (Toxic: A Fairy Tale For Grown-Ups) को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में कियारा एक बिल्कुल अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका में नजर आने वाली हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान, कियारा ने इस प्रोजेक्ट के साथ अपने जुड़ाव और शूटिंग के दौरान के दिलचस्प अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म की निर्देशक गीतू मोहनदास ने उनसे एक बेहद सख्त और अनोखी शर्त रखी थी, जिसका पालन करना कियारा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था।

सेट पर ‘हाय-हेलो’ पर लगा बैन

कियारा आडवाणी ने खुलासा किया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान निर्देशक गीतू मोहनदास ने उनसे स्पष्ट रूप से कह दिया था कि उन्हें सेट पर किसी से भी ‘हाय-हेलो’ या सामान्य बातचीत नहीं करनी है। कियारा ने बताया, “गीतू ने मुझसे कहा था, ‘ठीक है, कल जब तुम सेट पर आओगी, तो मैं चाहती हूँ कि तुम…’।”

कियारा के लिए यह निर्देश इसलिए भी अजीब था क्योंकि वह स्वभाव से बहुत मिलनसार हैं। उन्होंने आगे बताया, “मैं एक ऐसी इंसान हूँ कि जब मैं सेट पर जाती हूँ, तो मैं हमेशा ‘हाय, क्या चल रहा है, गुड मॉर्निंग’ कहती हूँ। मैं वैसी ही इंसान हूँ। लेकिन गीतू ने मुझसे साफ कह दिया, ‘मुझे कोई शिष्टाचार (pleasantries) नहीं चाहिए, मैं चाहती हूँ कि तुम सीधे अपने किरदार के ज़ोन में आओ। न कोई हाय, न हेलो, तुम्हारी टीम भी नहीं, कोई भी नहीं। बस आज उस ज़ोन में रहो’।”

किरदार की गहराई में उतरने की तैयारी

गीतू मोहनदास का यह सख्त निर्देश किसी सनक के कारण नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रचनात्मक सोच थी। फिल्म ‘टॉक्सिक’ की कहानी एक वयस्क परियों की कहानी पर आधारित है, जिसमें भावनाओं की तीव्रता बहुत अधिक है। निर्देशक चाहती थीं कि कियारा सेट पर कदम रखते ही अपने किरदार की मानसिक स्थिति में पूरी तरह डूब जाएं। सामान्य बातचीत करने से अभिनेता का ध्यान भटक सकता है और किरदार की गंभीरता प्रभावित हो सकती है।

इस अनुभव के बारे में बात करते हुए कियारा ने माना कि एक कलाकार के रूप में यह उनके लिए सीखने का एक नया तरीका था। हालांकि शुरुआत में उनके लिए बिना किसी से बात किए सीधे काम पर लगना थोड़ा असहज था, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि निर्देशक की यह ‘मेथड एक्टिंग’ वाली एप्रोच उनके अभिनय को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर रही है।

‘टॉक्सिक’ क्यों है कियारा के लिए खास?

कियारा आडवाणी के लिए ‘टॉक्सिक’ महज एक और फिल्म नहीं है, बल्कि यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। गीतू मोहनदास, जो अपनी सिनेमाई दृष्टि के लिए जानी जाती हैं, इस फिल्म के माध्यम से एक अनूठा अनुभव पेश करने वाली हैं। कियारा का इस फिल्म के प्रति समर्पण साफ झलकता है, क्योंकि उन्होंने निर्देशक की हर शर्त को स्वीकार किया ताकि वे अपनी परफॉरमेंस को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकें।

यह फिल्म न केवल कियारा की बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित करेगी, बल्कि दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाएगी जो वास्तविकता और कल्पना के बीच का संतुलन है। कियारा ने जिस तरह से अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर इस भूमिका के लिए खुद को ढाला है, उससे फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है।

अभिनेताओं और निर्देशकों के बीच का तालमेल

यह वाकया बॉलीवुड में अभिनेताओं के काम करने के तरीकों पर भी प्रकाश डालता है। कई बार निर्देशक अपने कलाकारों को उस ज़ोन में ले जाने के लिए कुछ कठोर कदम उठाते हैं। कियारा का यह अनुभव दिखाता है कि कैसे एक अच्छी फिल्म के लिए कलाकार और निर्देशक के बीच का तालमेल और एक-दूसरे पर भरोसा होना जरूरी है। बिना ‘हाय-हेलो’ किए सेट पर रहने की यह शर्त कियारा के लिए एक तपस्या की तरह थी, जिसने उन्हें एक अभिनेत्री के रूप में और अधिक परिपक्व बनाया है।

‘टॉक्सिक’ में कियारा आडवाणी को एक ऐसे अवतार में देखने के लिए दर्शक बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। जब एक कलाकार पूरी तरह से खुद को निर्देशक के विज़न के हवाले कर देता है, तभी एक ऐसी कृति तैयार होती है जो लंबे समय तक याद रखी जाती है। कियारा का यह ‘नो-प्लीजेंट्रीज़’ वाला अनुभव निश्चित रूप से फिल्म की स्क्रीन पर दिखने वाली गहराई में अपना रंग भरेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गीतू मोहनदास की इस सख्त हिदायत का क्या परिणाम ‘टॉक्सिक’ में देखने को मिलता है।

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