राज्यसभा ने जन विश्वास विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। जानें विधेयक के प्रमुख प्रावधान, व्यापार सुधार और नागरिक जीवन में सरलता लाने के उपाय।
राज्यसभा ने जन विश्वास विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक बुधवार को लोकसभा में पारित हो चुका था। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदन को बताया कि यह विधेयक विश्वास आधारित शासन को प्रोत्साहित करने और नागरिकों एवं व्यवसायों के लिए सहज प्रशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
विश्वास और अनुपालन पर आधारित शासन
पीयूष गोयल ने राज्यसभा में कहा कि इस विधेयक के माध्यम से “जानबूझकर कानून तोड़ने वालों में भय पैदा किया जाएगा” और “त्वरित एवं उचित दंड सुनिश्चित किया जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम जैसे आवश्यक नियमों को कमजोर नहीं करता। नकली दवाओं का निर्माण, आयात या बिक्री करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान इस विधेयक में शामिल है।
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व्यापार और नागरिक जीवन को सुगम बनाने के उपाय
विधेयक 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन करता है। इसमें व्यापार को सुगम बनाने के लिए 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है, जबकि नागरिक जीवन की सरलता के लिए 67 प्रावधानों में सुधार किया गया है। कुल मिलाकर यह विधेयक 1000 से अधिक अपराधों को तर्कसंगत बनाने, अप्रचलित प्रावधानों को हटाने और नियामक वातावरण में सुधार करने का प्रयास करता है।
प्रमुख सुधार और प्रवर्तन
- कारावास के प्रावधानों को मौद्रिक दंड या चेतावनी में बदलना।
- पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी और अपराध की प्रकृति के अनुसार जुर्माने और दंड का युक्तिकरण।
- न्यायनिर्णय अधिकारियों और आपीलीय प्राधिकरणों की नियुक्ति।
- मुकदमों का शीघ्र निपटान और अदालतों पर बोझ कम करना।
इसके अलावा, विधेयक नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत 67 संशोधनों का प्रस्ताव भी रखता है।