राजनीतिक भाषा के गिरते स्तर पर राजनाथ सिंह की चिंता, वेंकैया नायडू से सीखने की दी सलाह

राजनीतिक भाषा के गिरते स्तर पर राजनाथ सिंह की चिंता, वेंकैया नायडू से सीखने की दी सलाह

 

राजनाथ सिंह ने राजनीतिक संवाद की गिरती भाषा को शर्मनाक बताया। वेंकैया नायडू की जीवनी के विमोचन पर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखने की अपील की।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को देश में राजनीतिक संवाद के गिरते स्तर पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक भाषा जिस तरह से लगातार निम्न स्तर पर पहुंच रही है, वह बेहद शर्मनाक है। राजनाथ सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू के सार्वजनिक जीवन और उनकी राजनीतिक यात्रा का उदाहरण देते हुए नेताओं और जनप्रतिनिधियों से गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और शालीनता का विशेष महत्व है और वेंकैया नायडू का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद में सम्मान बनाए रखा जा सकता है।

वेंकैया नायडू की हिंदी जीवनी का विमोचन

राजनाथ सिंह नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू की हिंदी जीवनी ‘लोकप्रिय नेता वेंकैया नायडू: उदयगिरि से उपराष्ट्रपति तक’ के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पुस्तक वेंकैया नायडू के व्यक्तित्व, संघर्ष, राजनीतिक यात्रा और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सामने लाती है। उन्होंने कहा कि नायडू ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में लगातार संगठन, समाज और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी और उनकी राजनीतिक यात्रा देश के युवाओं तथा भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक है।

‘नेशन फर्स्ट, सेल्फ लास्ट’ की भावना

रक्षा मंत्री ने वेंकैया नायडू की राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नायडू ने हमेशा व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखा। राजनाथ सिंह ने उनकी जीवनशैली को ‘Nation First and Self Last’ की भावना का जीवंत उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, नायडू ने संगठन और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारियों को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से अधिक प्राथमिकता दी। यही कारण है कि उनका राजनीतिक सफर एक सामान्य कार्यकर्ता से देश के उपराष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी बन गया।

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

राजनाथ सिंह ने वेंकैया नायडू के साथ अपने लंबे राजनीतिक जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने छात्र राजनीति के माध्यम से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े। इसके बाद दोनों भारतीय जनता पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। राजनाथ सिंह ने कहा कि नायडू की राजनीतिक यात्रा संघर्ष, संगठन के प्रति समर्पण और निरंतर मेहनत का उदाहरण है। उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर काम करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

राज्यसभा के सभापति के तौर पर योगदान

राजनाथ सिंह ने वेंकैया नायडू के राज्यसभा के सभापति के रूप में किए गए कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नायडू के कार्यकाल में राज्यसभा की गरिमा बढ़ी और सदन की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। राजनाथ सिंह के अनुसार, उनके कार्यकाल में राज्यसभा की उत्पादकता में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने संसद में चली आ रही कुछ औपनिवेशिक परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में भी कदम उठाए और भारतीय भाषाओं तथा मातृभाषा के सम्मान पर जोर दिया।

‘आई बेग टू ले’ जैसी औपनिवेशिक परंपरा खत्म की

वेंकैया नायडू के राज्यसभा सभापति रहते हुए सदन की कार्यवाही से जुड़ी एक पुरानी औपनिवेशिक अभिव्यक्ति ‘I beg to lay’ को भी बंद किया गया था। यह वाक्य मंत्रियों द्वारा सदन के पटल पर दस्तावेज रखने के दौरान इस्तेमाल किया जाता था। नायडू ने भारतीय संसदीय परंपराओं और भाषाओं को अधिक सम्मान देने की दिशा में कई पहल कीं। उनके कार्यकाल को संसद की कार्यक्षमता और गरिमा से जुड़े सुधारों के लिए भी याद किया जाता है।

नितिन नबीन ने बताया युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने वेंकैया नायडू की राजनीतिक यात्रा को पार्टी कार्यकर्ताओं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि एक सामान्य जमीनी कार्यकर्ता से देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचने की नायडू की यात्रा संघर्ष और मेहनत की कहानी है। उन्होंने कहा कि भाजपा के शुरुआती दौर में लाखों कार्यकर्ताओं ने कठिन परिस्थितियों में संगठन के लिए काम किया और उनके संघर्ष ने पार्टी को मजबूत बनाया। वेंकैया नायडू भी इसी संघर्षशील परंपरा का हिस्सा रहे।

नायडू ने विपक्ष की भूमिका पर दिया संदेश

पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कार्यक्रम के दौरान संसद में रचनात्मक विपक्ष की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक विरोध व्यक्तियों के बजाय नीतियों और कार्यक्रमों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री का राजनीतिक विरोध किया जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने के साथ-साथ उनके विकल्प भी प्रस्तुत करने चाहिए, ताकि संसद प्रभावी ढंग से काम कर सके।

युवाओं को सकारात्मक और रचनात्मक बनने की सलाह

वेंकैया नायडू ने युवा पीढ़ी से सकारात्मक और रचनात्मक सोच अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में चरित्र, क्षमता, योग्यता और आचरण का विशेष महत्व है। उन्होंने युवाओं को नकारात्मक, विनाशकारी या बाधा पैदा करने वाली सोच से बचने की सलाह दी। उनके अनुसार, व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और व्यवहार से बनती है।

रेखा गुप्ता ने बताया ‘जनप्रिय नेता’

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी वेंकैया नायडू की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘जनता के नेता’ के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि नायडू के लिए पद कभी उनकी पहचान नहीं रहा, बल्कि लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण उनकी वास्तविक पहचान बना। उन्होंने कहा कि उदयगिरि से देश के उपराष्ट्रपति पद तक का सफर यह दिखाता है कि निरंतर मेहनत, संगठन के प्रति निष्ठा और जनसेवा के माध्यम से व्यक्ति राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। कार्यक्रम में नेताओं ने वेंकैया नायडू के जीवन को सार्वजनिक जीवन में गरिमा, अनुशासन और राष्ट्रहित की प्राथमिकता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

 

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