राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5% की बढ़त। सेबी के प्रतिबंध और राजस्व हेरफेर के आरोपों के बीच कंपनी ने दी सफाई। जानें राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में अचानक आए उछाल की वजह।
सोमवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों ने एक लंबे समय से चली आ रही गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए शानदार वापसी की। कंपनी के शेयर 5 प्रतिशत उछलकर 80.23 रुपये के अपर सर्किट पर पहुंच गए। यह उछाल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले सात सत्रों से शेयर लगातार गिर रहे थे, जिससे कंपनी का लगभग 30 प्रतिशत बाजार मूल्य (market value) खत्म हो गया था। बीते शुक्रवार को यह स्टॉक गिरकर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर 77.05 रुपये पर आ गया था। पिछले एक महीने में इसमें 24.5 प्रतिशत और छह महीनों में 58 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद सोमवार का यह सुधार निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर के रूप में आया है।
सेबी का आदेश: गिरावट की मुख्य वजह
इस शेयर में आई भारी गिरावट का मुख्य कारण भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा 3 जून को जारी किया गया एक अंतरिम आदेश था। सेबी ने अपने आदेश में राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके संस्थापक-चेयरमैन राजेश मेहता पर जांच पूरी होने तक प्रतिभूति बाजार (securities market) तक पहुँचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। नियामक का आरोप है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच अपने राजस्व (revenue) को लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। सेबी का कहना है कि इस अवधि के दौरान कंपनी की विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा रिपोर्ट किए गए राजस्व का एक बड़ा हिस्सा गलत तरीके से पेश किया गया था। सेबी ने सहायक कंपनियों से संबंधित खुलासों पर भी गंभीर चिंता जताई है, क्योंकि राजेश एक्सपोर्ट्स का 97-99 प्रतिशत समेकित राजस्व विदेशी संस्थाओं, विशेष रूप से स्विट्जरलैंड स्थित वैल्केम्बी एसए (Valcambi SA) से आता है।
कंपनी का पक्ष: आरोपों को सिरे से नकारा
इन गंभीर आरोपों के बावजूद, राजेश एक्सपोर्ट्स ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार किया है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसके वित्तीय खुलासे और रिपोर्ट किया गया राजस्व पूरी तरह से वास्तविक है। कंपनी का कहना है कि सेबी का आदेश केवल ‘अंतरिम’ (interim) प्रकृति का है और इसमें केवल प्रारंभिक टिप्पणियां शामिल हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स इस समय बाजार नियामक द्वारा उठाए गए सभी सवालों के जवाब सहायक दस्तावेजों और स्पष्टीकरणों के साथ तैयार करने की प्रक्रिया में है। कंपनी ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि वह पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है।
खुलासों में अंतर पर कंपनी की सफाई
सेबी द्वारा उठाए गए विभिन्न खुलासों और रिपोर्ट किए गए आंकड़ों में अंतर (variance) को लेकर भी कंपनी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि एनएसई (NSE) वोटिंग परिणामों, स्क्रूटिनाइज़र रिपोर्ट और बीएसई (BSE) शेयरहोल्डिंग पैटर्न में दिखाई देने वाले आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टिंग मानकों से संबंधित हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इनमें कट-ऑफ तिथि, डाले गए कुल वोट और चुकता शेयर पूंजी जैसे अलग-अलग पैरामीटर शामिल होते हैं। इसलिए, इन आंकड़ों में दिखने वाला अंतर किसी भी प्रकार की विसंगति या अनियमितता का संकेत नहीं है, बल्कि यह रिपोर्टिंग के अलग-अलग तरीकों का परिणाम है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और बाजार का रुख
राजेश एक्सपोर्ट्स के लिए यह एक बेहद कठिन दौर है। एक तरफ जहां बाजार नियामक कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता की जांच कर रहा है, वहीं दूसरी ओर निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। सोमवार को लगा अपर सर्किट यह तो दर्शाता है कि कुछ निवेशक निचले स्तर पर खरीदारी (bottom-fishing) कर रहे हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सेबी की जांच से कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकलता, तब तक स्टॉक में अस्थिरता बनी रहेगी। कंपनी का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह सेबी के सामने अपने वित्तीय दावों को कितनी मजबूती से सिद्ध कर पाती है।
राजेश एक्सपोर्ट्स के लिए आने वाले दिन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। एक वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनी के लिए 15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का मामला एक बड़ी चुनौती है। यदि कंपनी अपनी बात सही साबित करती है, तो शेयरों में पुनः स्थिरता देखी जा सकती है, लेकिन यदि जांच में कोई बड़ी विसंगति सामने आती है, तो यह न केवल शेयर की कीमत बल्कि कंपनी की साख के लिए भी एक बड़ा खतरा होगा। फिलहाल, निवेशकों को सावधानी बरतने और कंपनी के आधिकारिक जवाबों पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।