दीप्ति शर्मा ने पाकिस्तान के खिलाफ 5 विकेट लेकर रचा इतिहास। झूलन गोस्वामी के 355 विकेट के रिकॉर्ड को तोड़ने से बस 2 विकेट दूर। जानें दीप्ति के ऐतिहासिक सफर की पूरी जानकारी।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज स्पिन ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप 2026 के उद्घाटन मैच में अपने जादुई प्रदर्शन से क्रिकेट जगत को चकित कर दिया। एजबेस्टन के मैदान पर खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में उन्होंने न केवल भारत को 64 रनों से एक शानदार जीत दिलाई, बल्कि अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की एक नई ऊंचाई को भी छुआ। दीप्ति के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के कठिन दौरों के बाद मैदान पर उतरी थीं, जहां उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। आलोचकों का मानना था कि वह अपनी लय खो चुकी हैं, लेकिन दीप्ति ने अपने शांत स्वभाव और धैर्य से यह साबित कर दिया कि एक चैंपियन खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता।
करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
पाकिस्तान के खिलाफ दीप्ति शर्मा ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में केवल 10 रन देकर 5 विकेट झटके। यह उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का दूसरा ‘फाइव-विकेट हॉल’ (पांच विकेट) था। इस प्रदर्शन के साथ ही उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (सभी प्रारूपों को मिलाकर) में कुल विकेटों की संख्या 354 तक पहुँच गई है। यह आंकड़ा उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे सफल गेंदबाजों में से एक बनाता है। अब दीप्ति इतिहास रचने से केवल 2 विकेट दूर हैं। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी, जिनके नाम 355 विकेट दर्ज हैं, फिलहाल भारतीय महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली खिलाड़ी हैं। दीप्ति जिस लय में दिख रही हैं, उसे देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि वह बहुत जल्द झूलन गोस्वामी के इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को तोड़कर खुद को नंबर-1 बना लेंगी।
दीप्ति की गेंदबाजी रणनीति और पिच का मिजाज
मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में दीप्ति ने अपने प्रदर्शन का श्रेय पिच की परिस्थितियों और अपनी गेंदबाजी में बदलाव को दिया। उन्होंने कहा, “जब मुझे विकेट नहीं मिल रहे थे, तब भी मैं चिंतित नहीं थी। मुझे पता था कि सही समय आने पर मैं अपनी टीम के लिए जरूर योगदान दूंगी।” दीप्ति ने बताया कि एजबेस्टन की पिच पर गेंद टर्न हो रही थी, जिसका फायदा उठाने के लिए उन्होंने अपनी गति में लगातार विविधता (variation) रखी। हवा में गेंद को धीमा रखना और सटीक क्षेत्रों (right areas) में गेंदबाजी करना उनकी रणनीति का मुख्य हिस्सा था। उनका यह अनुशासित खेल पाकिस्तान की बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द बन गया, जो उनकी फिरकी के सामने घुटने टेकती नजर आईं।
टीम भावना और साथियों का सहयोग
दीप्ति शर्मा की सफलता में केवल उनका व्यक्तिगत कौशल नहीं, बल्कि टीम की सामूहिक मेहनत भी शामिल है। उन्होंने जीत के बाद स्मृति मंधाना और कप्तान हरमनप्रीत कौर के बीच हुई 91 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की विशेष रूप से प्रशंसा की। दीप्ति का मानना है कि एक ऑलराउंडर के रूप में जब उन्हें साथियों का ऐसा समर्थन मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास और भी बढ़ जाता है। टीम की एकजुटता ही वह कारण है जिसके चलते भारत ने पाकिस्तान पर इतना बड़ा दबाव बनाया और मैच को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा।
इतिहास रचने की दहलीज पर दीप्ति
दीप्ति शर्मा का 354 विकेटों तक पहुँचना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। वह न केवल गेंदबाजी में बल्कि बल्लेबाजी में भी भारत के लिए एक मजबूत स्तंभ रही हैं। आने वाले मैचों में, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ, दीप्ति का यह फॉर्म भारत के लिए संजीवनी का काम करेगा। क्रिकेट प्रशंसक अब बड़ी बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब वह झूलन गोस्वामी के कीर्तिमान को पार कर भारतीय महिला क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करेंगी।
दीप्ति शर्मा का यह प्रदर्शन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है जो खराब दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह सिखाया है कि खेल में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन जो खिलाड़ी धैर्य रखकर अपनी प्रक्रिया (process) पर विश्वास रखता है, वह सफलता के शिखर पर जरूर पहुँचता है। पाकिस्तान के खिलाफ यह जीत न केवल टूर्नामेंट में भारत के लिए एक बड़ा बोनस है, बल्कि यह दीप्ति के व्यक्तिगत गौरव की नई दास्तां भी है। आने वाले दिनों में जब भी भारतीय महिला क्रिकेट का इतिहास लिखा जाएगा, दीप्ति शर्मा का नाम उन दिग्गजों के साथ लिया जाएगा जिन्होंने अपनी फिरकी से दुनिया को अपना मुरीद बनाया।