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राजस्थान RGHS योजना में बदलाव से लाभार्थी और दवा कारोबारी परेशान। 880 करोड़ रुपये का बकाया और दवाओं की उपलब्धता में समस्याएं। जानें क्या है पूरा विवाद।
RGHS Scheme Update: राजस्थान में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई RGHS योजना में बदलाव के बाद लाभार्थी और दवा कारोबारी दोनों ही परेशान हैं। दवा कारोबारियों का दावा है कि उनका 880 करोड़ रुपये का बकाया है, और वे सरकार से इसकी तुरंत चुकौती की मांग कर रहे हैं। नए नियमों के तहत, तीन लाख से ज्यादा बिल का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, जिससे कारोबारी लाभार्थियों को बिना भुगतान के दवाएं देने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
दवाओं के लिए भटक रहे लाभार्थी
राजस्थान में लगभग 52 लाख लोग RGHS योजना से जुड़े हुए हैं, जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारी, उनके परिवार सदस्य, और पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। इस योजना के तहत लाभार्थियों को डॉक्टर की लिखी दवा किसी भी सरकारी मेडिकल स्टोर से मुफ्त में प्राप्त होती थी, लेकिन अब नई व्यवस्था में समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं।
नए नियमों के अनुसार, दुकानदारों को लाभार्थियों की दवाओं के विवरण को पोर्टल पर अपलोड करने और 21 दिनों के भीतर भुगतान प्राप्त करने की व्यवस्था थी। हालांकि, पोर्टल पर इन विवरणों का निस्तारण नहीं हो रहा है, जिससे दवा कारोबारियों को भुगतान नहीं मिल रहा है और इसके कारण लाभार्थियों को दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
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कारोबारी परेशान, 880 करोड़ रुपये का बकाया
दवा कारोबारियों का कहना है कि पिछले 45 महीनों में 880 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। कई बिल पोर्टल पर गायब हो गए हैं और उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, कारोबारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें बिलों पर अनावश्यक आपत्तियां लगाई जा रही हैं और कई बार पेनाल्टी भी लगाई जाती है, जिनका उनके द्वारा दी गई दवाओं से कोई ताल्लुक नहीं है।
लाभार्थियों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन रही है, क्योंकि दवा कारोबारी अब उनके लिए दवाएं देने में रुचि नहीं ले रहे हैं, और कई दुकानदार उन्हें दवाएं देने में आनाकानी कर रहे हैं। इसके अलावा, कई बार सर्वर डाउन होने के कारण लाभार्थियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे विशेषकर रिटायर्ड पेंशनर्स को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का बयान
राजस्थान सरकार का कहना है कि हां, कुछ समय पहले दवाओं के भुगतान में देरी हुई थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है। सरकार के कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि हाल ही में इस मुद्दे को संबोधित किया गया है और जल्द ही भुगतान प्रक्रिया सामान्य हो जाएगी।
योजना में गड़बड़ी की पहचान
वहीं, जानकारों का मानना है कि योजना में बदलाव के बाद कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। हालांकि, योजना का फंड बढ़ाया गया है, लेकिन इसका फायदा लाभार्थियों और कारोबारियों दोनों को नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों पर मलाई खाने का भी आरोप लग रहा है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
राजस्थान में RGHS योजना में किए गए बदलावों का फायदा सीधे तौर पर लाभार्थियों को नहीं मिल रहा है, और दवा कारोबारियों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। यदि जल्दी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह योजना राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है।