राहुल गांधी घायल छात्र को लेकर थाने पहुंचे, 7 घंटे धरने के बाद दर्ज हुई FIR

राहुल गांधी घायल छात्र को लेकर थाने पहुंचे, 7 घंटे धरने के बाद दर्ज हुई FIR

 

राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे और पैलेट गन मामले में FIR की मांग की। 7 घंटे के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस से पैलेट गन से घायल होने के मामले में अलग से FIR दर्ज करने की मांग की। राहुल गांधी का कहना था कि साहिल की शिकायत को स्वतंत्र रूप से दर्ज किया जाना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस के साथ काफी देर तक बातचीत के बावजूद जब FIR दर्ज नहीं हुई तो राहुल गांधी थाने के अंदर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके साथ साहिल लोचब और उसके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। करीब सात घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। FIR की कॉपी मिलने के बाद राहुल गांधी ने अपना धरना समाप्त किया और इसे न्याय की दिशा में पहला कदम बताया।

घायल छात्र को साथ लेकर पहले मंदिर मार्ग थाने पहुंचे

राहुल गांधी शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे साहिल लोचब और उसके परिवार के साथ उनके घर से निकले। साहिल का आरोप है कि 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई में पैलेट गन के छर्रे लगने से वह घायल हुआ था। राहुल गांधी सबसे पहले साहिल को लेकर मंदिर मार्ग थाने पहुंचे। वहां उन्होंने छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग की। हालांकि, उस समय थाने में कोई बड़ा पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं था। इसके बाद राहुल गांधी साहिल को साथ लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे, जहां दिल्ली पुलिस के DCP सचिन शर्मा समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे। राहुल गांधी ने अधिकारियों के सामने साहिल की मेडिकल रिपोर्ट भी रखी और उसके साथ हुई कथित घटना को गंभीर बताते हुए FIR दर्ज करने की मांग की।

राहुल गांधी ने पैलेट गन से घायल होने का दावा किया

थाने में बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने साहिल की चोटों को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि छात्र के शरीर में पैलेट गन के करीब 200 छर्रे लगे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, कुछ छर्रे साहिल के दिल के आसपास भी फंसे हुए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पैलेट गन से लगी चोटों के कारण साहिल की एक आंख की रोशनी चली गई है। राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि छात्र की शिकायत को अलग से दर्ज किया जाना जरूरी है, ताकि घटना में कथित तौर पर शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सके। उनका तर्क था कि घायल छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होना उसके कानूनी अधिकारों और न्याय की प्रक्रिया के लिए जरूरी है।

पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच के पास होने की बात कही

पुलिस अधिकारियों ने राहुल गांधी को बताया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उससे जुड़े हिंसा के मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, साहिल लोचब की शिकायत भी क्राइम ब्रांच को भेजी जा चुकी है। अधिकारियों का कहना था कि घटना से संबंधित जांच पहले से जारी है और ऐसे में अलग से FIR दर्ज करने को लेकर कानूनी प्रक्रिया और जांच की स्थिति को ध्यान में रखना होगा। पुलिस ने यह भी बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी एक कमेटी गठित की गई है। पुलिस का प्रारंभिक तर्क था कि जब मामले की जांच पहले से अलग एजेंसी और निगरानी व्यवस्था के तहत चल रही है, तो इस स्तर पर अलग FIR दर्ज करना उचित नहीं होगा।

FIR की मांग पर अड़े रहे राहुल गांधी

पुलिस अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत के बाद भी जब तत्काल FIR दर्ज नहीं हुई तो राहुल गांधी ने थाने से बाहर जाने के बजाय वहीं धरने पर बैठने का फैसला किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं होती, तब तक वह थाने से नहीं उठेंगे। राहुल गांधी के धरने के कारण संसद मार्ग थाने में काफी देर तक राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां देखने को मिलीं। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की भी थाने के आसपास मौजूदगी रही। राहुल गांधी लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि घायल छात्र की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उसके आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

करीब सात घंटे बाद दर्ज हुई FIR

राहुल गांधी के करीब सात घंटे तक थाने में धरने पर बैठने के बाद दिल्ली पुलिस ने आखिरकार अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी को उसकी कॉपी दी गई। इसके बाद उन्होंने अपना धरना समाप्त किया। राहुल गांधी ने FIR दर्ज होने को न्याय की दिशा में पहला कदम बताया। हालांकि, मामले में आगे की जांच और कार्रवाई अब पुलिस की जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। FIR में अज्ञात लोगों को आरोपी बनाए जाने के बाद जांच एजेंसियां घटना से जुड़े तथ्यों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

घटना को लेकर राजनीतिक बहस तेज

साहिल लोचब के घायल होने का मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। कांग्रेस की ओर से इस घटना को लेकर पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। राहुल गांधी के थाने पहुंचने और धरने पर बैठने से मामले ने और अधिक राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर से जुड़े मामलों की जांच पहले से क्राइम ब्रांच कर रही है और संबंधित शिकायत भी जांच एजेंसी के पास भेजी जा चुकी है। ऐसे में आगे की जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ, छात्र को किस परिस्थिति में चोट लगी और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि किस हद तक होती है।

अब जांच पर टिकी नजर

FIR दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। पुलिस को अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करनी होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक स्थिति सामने लानी होगी। साहिल लोचब की मेडिकल रिपोर्ट, प्रदर्शन के दौरान मौजूद वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। राहुल गांधी ने जिस तरह घायल छात्र के साथ थाने पहुंचकर FIR दर्ज कराने की मांग की, उससे इस मामले को राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी काफी महत्व मिला है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और FIR के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

 

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