पुरबयान चटर्जी और मार्क लेटियरी का नया एल्बम ‘फेदरड क्रिएचर्स’ संगीत की दुनिया में हलचल मचाने को तैयार है। जानिए कैसे पुरबयान सितार को एक नए वैश्विक स्वरूप में पेश कर रहे हैं।
भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में सितार को अक्सर एक पुरानी विरासत के रूप में देखा जाता है, जिसे कांच के बक्से में सुरक्षित रखा जाता है। लेकिन प्रख्यात सितार वादक पुरबयान चटर्जी इस धारणा को पूरी तरह से बदल रहे हैं। उनके लिए सितार कोई जड़ वस्तु नहीं, बल्कि एक जीवित और बेचैन जीव है, जो ध्यान (मेडिटेशन) भी कर सकता है और विद्रोह भी। पुरबयान चटर्जी का कलात्मक सफर ‘सेनिया मैहर’ परंपरा की गहरी जड़ों से लेकर वैश्विक संगीत के दिग्गजों के साथ उनके साहसिक प्रयोगों तक फैला हुआ है। अपनी कला के माध्यम से वे यह साबित कर रहे हैं कि संगीत की शुद्धता को बनाए रखते हुए भी आधुनिकता के साथ कदमताल करना संभव है।
अब, पुरबयान चटर्जी अपने नए नौ-ट्रैक वाले क्रॉस-कल्चरल प्रोजेक्ट ‘फेदरड क्रिएचर्स’ (Feathered Creatures) के साथ एक बार फिर संगीत की दुनिया में तहलका मचाने के लिए तैयार हैं। इस एल्बम में उन्होंने ‘स्नार्की पिल्पी’ (Snarky Puppy) के मशहूर गिटारवादक मार्क लेटियरी के साथ हाथ मिलाया है।
‘फ्यूजन’ की घिसी-पिटी परिभाषा को दी चुनौती
पुरबयान चटर्जी के लिए यह एल्बम केवल सितार और इलेक्ट्रिक गिटार को एक साथ लाने का कोई दिखावटी प्रयास नहीं है। वे कहते हैं कि यह दो संगीत-मस्तिष्क के बीच का वह गहरा विश्वास है, जहाँ दूरी, शैली और प्रशिक्षण गौण हो जाते हैं और केवल संगीत का ‘इंस्टिंक्ट’ (सहज ज्ञान) काम करता है। ‘फेदरड क्रिएचर्स’ में ‘9,000 माइल्स’, ‘हिबिस्कस’, ‘राइज एनश्राइंड’ और ‘शैलो वाटर ब्लैकआउट’ जैसे ट्रैक शामिल हैं। यह एल्बम भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और प्रोग्रेसिव रॉक के टेक्सचर के बीच एक पुल की तरह काम करता है, जो बिना किसी परंपरा को छोटा किए, वैश्विक संगीत के साथ एक नया संवाद स्थापित करता है।
‘शैलो वाटर ब्लैकआउट’ से बदलेगी सितार की वैश्विक छवि
न्यूज18 शोशा के साथ एक विशेष बातचीत में पुरबयान चटर्जी ने अपने नए प्रोजेक्ट के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने विशेष रूप से ‘शैलो वाटर ब्लैकआउट’ ट्रैक का जिक्र करते हुए कहा कि यह गाना वैश्विक श्रोताओं द्वारा सितार को देखने के नजरिए को पूरी तरह बदल देगा। उन्होंने उन आलोचकों को भी जवाब दिया जो मानते हैं कि संगीत का अन्य शैलियों के साथ संवाद शास्त्रीय शुद्धता को कम करता है। पुरबयान का स्पष्ट मानना है कि यदि नींव मजबूत हो, तो संगीत के प्रयोग उसे कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध करते हैं।
परंपरा और तकनीक का विस्तार
पुरबयान चटर्जी संगीत में तकनीक को परंपरा के दुश्मन के रूप में नहीं, बल्कि उसके विस्तार के रूप में देखते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने राकेश चौरसिया, ओजस अधिया और शिखर नाद कुरैशी के साथ अपने हालिया छह-शहरों के भारत दौरे को भी याद किया। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीतकारों के लिए देश में मजबूत प्लेटफॉर्म बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि नई पीढ़ी के कलाकारों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सके।
अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए, उन्होंने यह भी साझा किया कि कैसे उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म भूमिका के लिए फरहान अख्तर को सितार वादन के गुर सिखाए। इससे पहले वे स्टीवन विल्सन, जॉर्डन रुडेस और स्नार्की पिल्पी जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ अपने यादगार सहयोगों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं।
संगीत की नई दिशा: सीमाओं के पार एक संवाद
पुरबयान चटर्जी का मानना है कि संगीत की अपनी कोई सीमा नहीं होती। जब वे मार्क लेटियरी जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ काम करते हैं, तो भाषा या राग की सीमाओं से ऊपर उठकर केवल ‘राग और लय’ का संवाद बचता है। ‘फेदरड क्रिएचर्स’ केवल एक एल्बम नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि कैसे सितार जैसे प्राचीन वाद्ययंत्र को आज के युग के ‘IDM ब्रेकबीट्स’ या ‘साइ-ट्रांस’ जैसी आधुनिक ध्वनियों के साथ पिरोया जा सकता है।
आने वाले दिनों में यह एल्बम संगीत प्रेमियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। पुरबयान चटर्जी का यह प्रयास उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी दुनिया के साथ संगीत का संवाद करना चाहते हैं। वे संगीत की उन बेड़ियों को तोड़ रहे हैं जो हमें ‘शुद्धता’ के नाम पर प्रयोग करने से रोकती हैं, और इस प्रक्रिया में वे सितार को एक ऐसी ऊंचाई पर ले जा रहे हैं जहाँ वह हर सुनने वाले की रूह को छूने की क्षमता रखता है।