पंजाब में आप नेताओं पर छापेमारी को लेकर सियासत तेज। पंजाब सरकार ने इसे 2027 चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बताया, बीजेपी पर निशाना साधा गया।
पंजाब में हाल ही में हुई छापेमारी की घटनाओं को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के आवास और कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर पर हुई जांच/छापेमारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह कार्रवाई 2027 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश का हिस्सा है। सरकार के नेताओं का कहना है कि विपक्षी दल खासकर भारतीय जनता पार्टी राज्य के नेताओं को निशाना बनाकर उन्हें डराने और कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
ਬੀਤੇ ਦਿਨੀਂ ਰਾਜ ਸਭਾ ਸਾਂਸਦ ਅਸ਼ੋਕ ਮਿੱਤਲ ਦੇ ਘਰ ਛਾਪੇਮਾਰੀ ਕੀਤੀ, ਅੱਜ ਸਾਡੇ ਕੈਬਿਨੇਟ ਮੰਤਰੀ ਸੰਜੀਵ ਅਰੋੜਾ ਦੇ ਘਰ ਛਾਪੇਮਾਰੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ
ਇਸ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਭਾਜਪਾ ਦੀ ਪੰਜਾਬ 2027 ਚੋਣਾਂ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਈ ਹੈ, ਇਹ ਸਾਡੇ ਆਗੂਆਂ ਨੂੰ ਡਰਾ ਰਹੇ ਨੇ ਕਿ ਜਾਂ ਤਾਂ ਚੋਣ ਨਾ ਲੜੋ ਤੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਭਾਜਪਾ ਦੀ ਮਸ਼ੀਨ… pic.twitter.com/4q2vNxgE9M— AAP Punjab (@AAPPunjab) April 17, 2026
पार्टी नेताओं ने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य न केवल राजनीतिक छवि को प्रभावित करना है, बल्कि नेताओं को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने की रणनीति भी हो सकती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
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हालांकि, इस पूरे मामले पर जांच एजेंसियों की ओर से अब तक कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एजेंसियों का कहना है कि सभी कार्रवाई नियमानुसार और जांच प्रक्रिया के तहत की जाती है।
फिलहाल पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।