Punjab OPS Update 2025: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, अब विशेष श्रेणी के कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन योजना (OPS)

Punjab OPS Update 2025: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, अब विशेष श्रेणी के कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन योजना (OPS)

Punjab OPS Update 2025: पंजाब सरकार का ऐतिहासिक फैसला, अब 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त विशेष श्रेणी के सरकारी कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन योजना (OPS)।

Punjab OPS Update 2025: पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पंजाब सिविल सेवा नियमों में बड़ा संशोधन किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) का रास्ता खोल दिया है, जो नियुक्ति में तकनीकी देरी की वजह से इस योजना से वंचित रह गए थे।

अब 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त विशेष श्रेणी के कर्मचारी OPS का विकल्प चुन सकेंगे। सरकार ने इस फैसले को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।


कौन उठा सकता है OPS का लाभ?

पंजाब सरकार द्वारा जारी संशोधित नियमों में दो प्रमुख श्रेणियां शामिल की गई हैं:

  1. भर्ती विज्ञापन 1 जनवरी 2004 से पहले जारी: यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति 1 जनवरी 2004 के बाद हुई, लेकिन उसका भर्ती विज्ञापन इससे पहले निकाला गया था, तो वह पुरानी पेंशन योजना के लिए पात्र होगा।

  2. हमदर्दी के आधार पर नियुक्त कर्मचारी: जिन कर्मचारियों की नियुक्ति सहानुभूति (compassionate grounds) के आधार पर हुई और उनकी अर्जी 1 जनवरी 2004 से पहले जमा की गई थी, वे भी OPS का लाभ उठा सकेंगे।

तीन महीने के भीतर विकल्प चुनना अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पात्र कर्मचारियों को तीन महीने के भीतर यह तय करना होगा कि वे OPS को चुनना चाहते हैं या नई पेंशन योजना (NPS) के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। अगर कोई कर्मचारी समय रहते विकल्प नहीं देता, तो उसे स्वचालित रूप से NPS में शामिल कर दिया जाएगा।

कर्मचारियों को मिली राहत

यह निर्णय उन हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है जो लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे थे। मान सरकार ने कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए इस संशोधन को मंजूरी दी है।

पंजाब सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम न सिर्फ कर्मचारियों के हित में है, बल्कि यह लोक कल्याण और कर्मचारी सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक दूरदर्शी फैसला है।

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