पंजाब विधानसभा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के विवादित बयानों के खिलाफ विशेषाधिकार समिति को जांच के लिए भेजने का प्रस्ताव पारित किया। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि खैरा के बयान सदन, संविधान और जनता के जनादेश का अपमान हैं।
पंजाब विधानसभा ने गुरुवार को कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजने के लिए भारी बहुमत से प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किया गया, जिसमें विधायक खैरा के हालिया अपमानजनक बयानों और असंसदीय आचरण का उल्लेख किया गया है। सदन ने इन बयानों को अपने निर्वाचित सदस्यों, संविधान और जनता के जनादेश का सीधा अपमान माना।
मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग खैरा द्वारा 10 मार्च 2026 को सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट से उत्पन्न हुई। इन पोस्ट में उन्होंने स्पीकर, मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों को ‘बंधुआ मजदूर’ कहा था। सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस तरह की भाषा संवैधानिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों की गरिमा को ठेस पहुँचाती है और जनता द्वारा दिए गए जनादेश का अपमान करती है।
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हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि 11 मार्च 2026 को विधायक खैरा को अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने का अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने शब्द वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके अलावा, विपक्ष के सदन से वॉकआउट के दौरान खैरा द्वारा किए गए आपत्तिजनक शारीरिक हावभाव की भी कड़ी निंदा की गई।
पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस आचरण से संसदीय मर्यादा का उल्लंघन हुआ है और कुछ कांग्रेस विधायकों द्वारा ऐसे व्यवहार को देखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विधायकों द्वारा सोशल मीडिया पर लोकप्रियता, मनोरंजन या वित्तीय लाभ के लिए इस तरह की शब्दावली और नाटकीयता का इस्तेमाल करना संविधान के प्रति ली गई शपथ का उल्लंघन है।
सदन की गरिमा की रक्षा के लिए चीमा ने सभी सदस्यों से अपील की कि विशेषाधिकार समिति को इस मामले की व्यापक जांच सौंपा जाए, ताकि विधानसभा की पवित्रता और पेशेवर मर्यादा सुनिश्चित की जा सके।