राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने IVRI के दीक्षांत समारोह में संबोधन देते हुए पशु चिकित्सा में प्रौद्योगिकी, संरक्षण और उद्यमिता पर जोर दिया। पढ़ें पूरी खबर।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के दीक्षांत समारोह में भाग लिया और छात्रों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, संरक्षण और उद्यमिता पर जोर दिया।
राष्ट्रपति का मुख्य संदेश:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपनी भाषा में कहा कि हमारी संस्कृति ‘ईशावास्यम् इदं सर्वम्’ की शिक्षाओं पर आधारित है, जो सभी जीवों में ईश्वर की उपस्थिति को मानती है। उन्होंने यह भी बताया कि मनुष्य और प्रकृति के बीच सह-अस्तित्व जरूरी है, क्योंकि कई वन्य जीव विलुप्त होने के कगार पर हैं। उन्होंने जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की अहमियत पर बल दिया।
वन हेल्थ और पशु कल्याण पर जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि मानव, पालतू और जंगली जानवर, वनस्पतियां तथा पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर हैं। ऐसे में पशु कल्याण के लिए समर्पित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने IVRI को जूनोटिक रोगों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्थान बताया।
तकनीक से पशु चिकित्सा में क्रांति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि तकनीकी प्रगति जैसे जीनोम एडिटिंग, भ्रूण स्थानांतरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स पशु चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने IVRI से स्वदेशी, कम लागत वाले उपचार और दवाओं के विकल्प खोजने को कहा, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों।
छात्रों को उद्यमी बनने की प्रेरणा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने IVRI के छात्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने बेजुबान जानवरों के कल्याण को अपना करियर चुना है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे संकट की स्थिति में जानवरों के बारे में सोचकर सही निर्णय लें। साथ ही उन्होंने पशु विज्ञान के क्षेत्र में स्टार्ट-अप और उद्यमिता को बढ़ावा देने की अपील की ताकि वे रोजगार सृजन और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सकें।
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