प्री-डायबिटीज वह अवस्था है जिसमें किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर स्तर सामान्य से थोड़ा अधिक होता है, लेकिन इतना अधिक नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए। यह केवल शुरुआती चेतावनी के रूप में दिखाई देती है, लेकिन एक्सपर्ट इसे गंभीरता से लेते हैं। दरअसल, इस स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होना शुरू हो जाता है, और समय पर ध्यान न देने पर यह डायबिटीज में बदल सकती है।
दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे मामले
विश्व स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार प्रीडायबिटीज के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। कई लोग इस अवस्था से ग्रस्त हैं, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं होता। लंबे समय तक ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर रहने पर दिल, ब्लड वेसल्स और मेटाबॉलिक सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर इसे शुरुआती चेतावनी मानते हैं ताकि समय रहते इसे नियंत्रित किया जा सके।
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एक्सपर्ट की राय
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शिवानी चौहान के अनुसार प्रीडायबिटीज उन लोगों में देखी जाती है जिनका ग्लूकोज या HbA1c स्तर डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचता, लेकिन कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म सामान्य नहीं रहता। आमतौर पर HbA1c का स्तर 5.7% से 6.4% के बीच होने पर इसे प्रीडायबिटीज माना जाता है।
क्यों बढ़ रही चिंता?
इस स्थिति में शरीर में धीरे-धीरे बदलाव शुरू हो जाते हैं, जैसे ब्लड वेसल्स और नसों को नुकसान। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए तो टाइप-2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, बैठने की आदत और बढ़ता मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है। उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने और शारीरिक गतिविधि कम होने से जोखिम और बढ़ जाता है।
प्री-डायबिटीज को कैसे कंट्रोल करें
प्री-डायबिटीज को समय पर पहचान कर नियंत्रित किया जा सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण सबसे प्रभावी उपाय हैं। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करती है। कई मामलों में केवल लाइफस्टाइल में बदलाव से ब्लड शुगर सामान्य स्तर पर वापस आ जाता है।
प्री-डायबिटीज को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय रहते जागरूकता और जीवनशैली सुधार से आप इसे रोक सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।