आप नेता प्रवीण राम ने भाजपा सरकार पर निशाना साध दिया। उसने कहा कि आज कानून का पालन करने वाली सरकार ही कानून का अपमान कर रही है।
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ी है। आम आदमी पार्टी के युवा नेता प्रवीण राम ने कहा कि कानून और व्यवस्था कायम रखना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है, लेकिन गुजरात में हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। उनका आरोप था कि भाजपा के सदस्यों ने कानून का मजाक बनाया और जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रवीण राम ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है जब रक्षकों को भक्षकों की तरह देखा जाता है।
कानून व्यवस्था की गिरावट पर उठाए गए प्रश्न
प्रवीण राम ने गुजरात की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज अपराधी बेखौफ हैं, जबकि शांतिपूर्वक अपनी बात कहने वाले युवा और कार्यकर्ता को जेल में डाला जा रहा है। उनका आरोप था कि सरकारी तंत्र दोहरा मानक अपनाता है और शासन का उद्देश्य जनता को बचाना होता है, न कि सत्ता का दुरुपयोग कर विरोधियों को दबाना होता है। उन्हें लगता है कि राज्य की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँच रही है क्योंकि सत्ता पक्ष के लोग नियमों को ताक पर रखकर चुनावी राजनीति कर रहे हैं।
राजनीतिक जोड़-तोड़ और ‘डील’ की राजनीति
प्रवीण राम ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और विपक्षी नेताओं के बदलते रुख पर टिप्पणी करते हुए इसे ‘सौदेबाजी की राजनीति’ कहा। उनका आरोप था कि भाजपा जनता के मुद्दों पर काम करने के बजाय विपक्षी दलों को विभाजित करने और साजिश करने में व्यस्त है। प्रवीण राम का कहना है कि आज राजनीति सिर्फ सत्ता हासिल करने का साधन बन गई है, जिसमें जनसेवा और नैतिकता का कोई स्थान नहीं है। उनका कहना था कि कानून को अपने हाथ में रखने वालों को चुनाव लड़ने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए।
अहंकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का आह्वान
प्रवीण राम ने कहा कि गुजरातियों ने अब ‘सत्ता के अहंकार’ को पहचान लिया है, आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति बताते हुए। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी राज्य में एक विकल्प बन रही है जो सिर्फ जनता के अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं पर जोर देता है। उन्होंने भ्रष्टाचार और माफियाओं को कथित रूप से सरकारी सुरक्षा मिलने के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का वादा किया। प्रवीण राम ने कहा कि अब गुजरात की जनता कानून का मजाक उड़ाकर सत्ता पर काबिज रहना चाहती है।