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सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह ने एक साल बाद अपने ऊपर लगे यौन दुराचार के आरोपों पर माफी मांगी। जानें उन्होंने अपने बयान में क्या कहा।
मई 2025 में, भारतीय फिल्म उद्योग उस समय स्तब्ध रह गया था जब ‘होमबाउंड’, ‘जुबली’ और ‘कंट्रोल’ जैसी प्रशंसित परियोजनाओं के लिए जाने जाने वाले सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह पर कई महिलाओं ने यौन दुराचार और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद प्रतीक शाह सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब हो गए थे। अब, एक साल की लंबी खामोशी के बाद, उन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए एक औपचारिक माफीनामा जारी किया है। ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ को दिए गए अपने बयान में प्रतीक ने न केवल अपने अतीत के कृत्यों के लिए माफी मांगी है, बल्कि अपने सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया है।
करियर की सफलता और व्यक्तिगत विफलताएं
प्रतीक शाह ने अपने बयान में स्वीकार किया कि करियर की तेजी से बढ़ती सफलता और मिलने वाले ध्यान ने उनके निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित किया था। उन्होंने कहा, “पीछे मुड़कर देखने पर मुझे महसूस होता है कि मैंने अपनी सफलता और करियर के विकास को अपने विवेक पर हावी होने दिया। इसके परिणामस्वरूप मेरे व्यवहार में जो आया, वह पूरी तरह से आत्म-केंद्रित और गलत था।” उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपनी असुरक्षा और मान्यता (validation) पाने की गलत चाहत से प्रेरित थे। प्रतीक ने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि उन्होंने एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में अपने पद और विशेषाधिकार की शक्ति को कभी नहीं समझा और न ही यह सोचा कि उनके कार्यों का दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
“खुद को सुधारने की दिशा में चल रहा है काम”
अपनी माफी में प्रतीक ने इस बात पर जोर दिया है कि वे पिछले एक साल से खुद को बेहतर बनाने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि वे साप्ताहिक चिकित्सा (therapy) ले रहे हैं, जिसने उन्हें अपने व्यवहार और सोच के प्रति आत्म-जागरूक होने में मदद की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एक और महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए कहा कि वे पिछले एक साल से अधिक समय से ‘सोबर’ (नशे से मुक्त) हैं। उनके अनुसार, यह संयम उनके पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक सक्रिय और आवश्यक कदम रहा है। प्रतीक का मानना है कि इन व्यक्तिगत परिवर्तनों ने उन्हें यह समझने में मदद की है कि वे पहले गलत थे।
बचाव के बजाय जिम्मेदारी स्वीकारना
आरोप सामने आने के शुरुआती दिनों के बारे में बात करते हुए प्रतीक ने स्वीकार किया कि उस समय उनकी पहली प्रवृत्ति सार्वजनिक रूप से अपना बचाव करने की थी। हालांकि, समय बीतने के साथ उन्हें यह अहसास हुआ कि आरोपों के विवरण पर बहस करना या खुद को सही साबित करने की कोशिश करना उनके द्वारा किए गए कार्यों की वास्तविकता को नहीं बदल सकता। उन्होंने कहा, “मेरी प्रतिष्ठा और रिश्तों का टूटना मेरे अपने गलत फैसलों का सीधा परिणाम था। मैं अपनी उन गलतियों के लिए पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ, जिन्होंने मेरे परिवार, दोस्तों और सहयोगियों को शर्मिंदगी और दर्द पहुंचाया है।” उन्होंने स्वीकार किया कि उनके कार्यों का खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ा जो उन पर भरोसा करते थे।
फिल्म जगत में नैतिकता और जवाबदेही की बहस
प्रतीक शाह का यह माफीनामा फिल्म जगत में नैतिकता, शक्ति के दुरुपयोग और जवाबदेही पर एक बड़ी बहस को फिर से जीवित करता है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उनकी यह माफी उन महिलाओं को न्याय दिलाने में मदद करती है, जिन्होंने उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। एक साल बाद सामने आई यह प्रतिक्रिया तब आई है जब भारतीय फिल्म उद्योग में ‘मीटू’ (Me Too) के बाद से ‘सेफ वर्कप्लेस’ (Safe Workplace) के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है। प्रतीक शाह का मामला इस बात की याद दिलाता है कि भले ही एक कलाकार अपने काम के लिए कितना भी प्रशंसित क्यों न हो, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में उसका व्यवहार और दूसरों के प्रति सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है।
यह माफीनामा एक ऐसे दौर में आया है जहां प्रशंसक और उद्योग के साथी दोनों ही यह देख रहे हैं कि क्या कोई व्यक्ति वाकई अपने गलत कार्यों से सीख लेकर खुद को बदल सकता है। फिलहाल, प्रतीक शाह ने अपनी गलती मान ली है और सुधार की प्रक्रिया का दावा किया है, लेकिन आने वाला समय ही बताएगा कि फिल्म जगत में उनकी वापसी होगी या नहीं। उनकी कहानी एक चेतावनी की तरह है कि सत्ता और प्रसिद्धि के शिखर पर होने के बावजूद, हर व्यक्ति अपने कार्यों के लिए जवाबदेह है।