पीएम मोदी: ‘बंगाल को बदलाव चाहिए’: पीएम मोदी ने साझा किए चुनावी दौरे के पल, TMC के ‘जंगलराज’ पर साधा निशाना।

पीएम मोदी: 'बंगाल को बदलाव चाहिए': पीएम मोदी ने साझा किए चुनावी दौरे के पल, TMC के 'जंगलराज' पर साधा निशाना।

पीएम मोदी ने बंगाल दौरे के बाद ‘X’ पर खास तस्वीरें साझा कीं और दावा किया कि जनता अब भाजपा को चाहती है। जानें बनगांव रैली के बड़े वादे और भ्रष्टाचार पर मोदी का प्रहार।

सोशल मीडिया पर ‘परिवर्तन’ का संदेश और जनता का उत्साह

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के चुनावी समर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर राज्य के दौरे की कुछ भावुक और ऊर्जावान तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों और वीडियो के साथ पीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि शहर और जनता का मिजाज यह साफ कर रहा है कि बंगाल अब सत्ता में बड़ा बदलाव चाहता है और भारतीय जनता पार्टी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। कोलकाता की सड़कों पर उमड़ी भारी भीड़ और बनगांव की रैली में समर्थकों का जोश राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और “परिवर्तन की लहर” को मजबूती से पेश करता है।

बनगांव रैली में ‘जंगलराज’ पर प्रहार और विकास का संकल्प

मतुआ समुदाय के गढ़ बनगांव में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की और राज्य की वर्तमान स्थिति को “महा जंगलराज” की संज्ञा दी। उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जहां एक ओर हुगली नदी के किनारे के कारखाने और मिलें बंद हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार का सिंडिकेट तेजी से फल-फूल रहा है। पीएम ने “पलटानों दरकार” (बदलाव की जरूरत है) का नारा बुलंद करते हुए मतदाताओं से अपील की कि वे बंगाल के गौरव को वापस लौटाने और सिंडिकेट राज को खत्म करने के लिए भाजपा को मौका दें।

महिलाओं, युवाओं के लिए ऐतिहासिक वादे और सांस्कृतिक जुड़ाव

पीएम मोदी ने बंगाल के भविष्य को संवारने के लिए कई दूरगामी योजनाओं का रोडमैप भी पेश किया, जिसमें महिलाओं के लिए सालाना ₹36,000 की आर्थिक मदद और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण जैसे वादे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, युवाओं के लिए ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ के जरिए कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात कही गई। रैली के बाद, कोलकाता में किए गए मेगा रोड-शो और थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना के जरिए प्रधानमंत्री ने न केवल अपनी सांस्कृतिक निष्ठा प्रदर्शित की, बल्कि विपक्ष के “बाहरी पार्टी” वाले नैरेटिव का जवाब देते हुए खुद को बंगाल की मिट्टी और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ दिखाया।

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