प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा संभव, डोनाल्ड ट्रंप से हो सकती है अहम बैठक

प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा संभव, डोनाल्ड ट्रंप से हो सकती है अहम बैठक

प्रधानमंत्री मोदी अगले महीने UNGA 2025 के लिए अमेरिका जा सकते हैं, जहां वे डोनाल्ड ट्रंप से व्यापार, टैरिफ और रूस से तेल खरीद को लेकर अहम चर्चा कर सकते हैं। भारत-अमेरिका संबंधों में नई पहल की उम्मीद।

प्रधानमंत्री मोदी अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) 2025 में भाग लेने के लिए अमेरिका जा सकते हैं। इस दौरान मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यापार और टैरिफ विवादों समेत रूस से तेल खरीद को लेकर चर्चा होने की संभावना है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच रिश्तों में नया मोड़ ला सकती है और वैश्विक राजनीतिक व आर्थिक परिदृश्य पर प्रभाव डाल सकती है।

साल 2025 की सितंबर में न्यूयॉर्क में होने वाले UNGA के शिखर सम्मेलन में विश्व के कई शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे, जहां अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी इस मौके पर ट्रंप से मुलाकात कर भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों और व्यापारिक असहमति पर बातचीत करेंगे।

टैरिफ विवाद और व्यापार समझौता

भारत और अमेरिका के बीच कृषि और डेयरी उत्पादों को लेकर समझौते में रुकावटें बनी हुई हैं। इसके चलते ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया है, जबकि रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ा गया है। कुल मिलाकर 50% टैरिफ लागू होने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है। 7 अगस्त से आधा टैरिफ लागू हो चुका है, जबकि बाकी 27 अगस्त से लागू होगा।

दोनों देश उच्च स्तरीय बैठक के माध्यम से इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि द्विपक्षीय संबंध बेहतर हो सकें।

रूस से तेल खरीद और कूटनीतिक तनाव

यूक्रेन युद्ध के बीच भारत का रूस से तेल खरीदना अमेरिका के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। व्हाइट हाउस इसे रूस के युद्ध प्रयासों का समर्थन मानता है, वहीं भारत ने अमेरिकी आलोचना को दोहरे मानकों वाला बताया है। इस मुद्दे ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

ट्रंप-पुतिन बैठक पर नजर

15 अगस्त को डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक होने जा रही है, जो तीन साल से जारी यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा करेगी। भारत इस बैठक पर भी विशेष नजर रखेगा क्योंकि यह उसकी ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है।

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