प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में नारी शक्ति को विकास का इंजन बताया। जानें नारी शक्ति वंदन अधिनियम और 6,350 करोड़ की योजनाओं के बारे में।
नारी शक्ति: विकसित भारत के संकल्प की आधारशिला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी में आयोजित ‘महिला सम्मेलन’ के दौरान महिला सशक्तिकरण को अपनी सरकार की नीतियों का केंद्र बिंदु बताया। उन्होंने ‘नारी शक्ति’ को भारत की विकास यात्रा का मुख्य चालक बताते हुए कहा कि एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) का सपना महिलाओं के योगदान और उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना अधूरा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भूमिका सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कानूनी सुधार और सुरक्षा का नया वातावरण
कनेक्टिविटी हो, हेल्थकेयर इकोसिस्टम हो या फिर काशी की विरासत का संरक्षण, यहां के लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। pic.twitter.com/uJUJT4vser
— Narendra Modi (@narendramodi) April 28, 2026
उत्तर प्रदेश के बदलते परिदृश्य का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य प्रशासन ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता जैसे नए कानूनी सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि गंभीर अपराधों के त्वरित समाधान के लिए तंत्र को मजबूत किया गया है। महिला पुलिस थानों और काउंसलिंग केंद्रों के विस्तार से समाज में सुरक्षा की भावना और मजबूत हुई है, जिससे महिलाएं अब अधिक आत्मविश्वास के साथ सार्वजनिक जीवन में हिस्सा ले रही हैं।
कनेक्टिविटी और विकास की नई सौगातें
वाराणसी के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने लगभग ₹6,350 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें वाराणसी और अयोध्या के बीच कनेक्टिविटी सुधारने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही, उन्होंने दो नई अमृत भारत ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई, जो वाराणसी को पुणे और अयोध्या को मुंबई से जोड़ेंगी। यह कदम न केवल उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संबंधों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि धार्मिक और शहरी केंद्रों तक पहुंच को भी सुगम बनाएगा।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विधायी सुधार
महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए, पीएम मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है। उन्होंने इसे एक लंबे समय से लंबित कमी को दूर करने वाला कदम बताया, जो देश के नीति-निर्धारण में महिलाओं की आवाज को और बुलंद करेगा।
कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक परिवर्तन
प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया, जिन्होंने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है। उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना को बालिकाओं की शिक्षा और वित्तीय सुरक्षा का आधार बताया, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं के नाम पर घरों के पंजीकरण को एक बड़ा सामाजिक बदलाव करार दिया। उन्होंने शौचालय निर्माण और वित्तीय समावेशन (बैंक खाते) जैसी पहलों को गिनाते हुए कहा कि इन बुनियादी सुविधाओं ने करोड़ों महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया है।
गुजरात से दिल्ली तक: सशक्तिकरण का सफर
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया। उन्होंने बताया कि किस तरह उस समय शुरू की गई कन्या शिक्षा और स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या (ड्रॉपआउट रेट) कम करने की योजनाओं ने सफलता पाई। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जब घर के भीतर महिलाएं सशक्त होती हैं, तो उससे परिवार, समाज और अंततः पूरा राष्ट्र मजबूत होता है।